जेल में बंद सिख कैदियों से दूर रखे गये हैं कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार

उनके चेहरे पर अभी भी भले खौफ है लेकिन आत्मा में शायद ही आत्मग्लानि हो . ये बातें हो रही है एक नरसंहार के आरोपी की जिन्होंने सन १९८४ में दिल्ली की सड़कों पर सरदारों का उतना खून बहाया था जितना कि क्रूर आक्रान्ता औरंगजेब भी नहीं बहा पाया था . सज्जन कुमार अब जेल भेजे जा चुके हैं और भले ही उनके द्वारा नरसंहार के समय पुलिस उतनी सुरक्षा सरदारों को न दे पाई रही हो पर अब सज्जन कुमार की सुरक्षा से कोई भी समझौता नहीं किया जा रहा है .

हाई कोर्ट ने 17 दिसंबर को कुमार को दोषी ठहराते हुए ‘आजीवन कारावास’ की सजा सुनाई थी. सज्जन कुमार ने अपनी दोषसिद्धि के बाद कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. कुमार को साउथ वेस्ट दिल्ली की पालम कॉलोनी के राज नगर पार्ट-1 क्षेत्र में एक-दो नवंबर 1984 को पांच सिखों की हत्या और राज नगर पार्ट-दो में एक गुरुद्वारा जलाने के मामले में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई थी. उसके बाद लम्बे समय तक भागने के बाद आख़िरकार सज्जन कुमार को सरेंडर कर के जेल जाना ही पड़ा . सूत्रों के अनुसार जेल कर्मियों को यह सुनिश्चित करने के लिये कहा गया है कि जेल में सजा काट रहे दो-तीन सिख कैदियों को एहतियातन कुमार से दूर रखा जाये.

इस समय सज्जन कुमार दिल्ली की मंडोली जेल में रखे गये हैं . सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से आ रही खबरों ने बताया कि सज्जन कुमार को मंडोली जेल के बैरक नम्बर 14 में रखा जाएगा. दिल्ली के सरकारी अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण के बाद पुलिस उसे लेकर जेल लेकर पहुंची.  उन्होंने बताया कि जेल के डॉक्टर ने भी सज्जन कुमार की मेडिकल जांच की. उनकी उम्र के कारण उनकी विस्तृत चिकित्सकीय जांच हुई. सडको पर टायर बाँध कर सरदारों को जलाने का आरोप झेल रहे सज्जन कुमार ने डॉक्टर को बताया कि उन्हें दमा की दिक्कत है और वह शरीर में दर्द से परेशान हैं. कुमार अपने साथ कई दवाएं भी लाए हैं. जेल में पहुंचने के पहले दिन, कुमार ने खाना नहीं खाया और उनके साथ कोई विशेष व्यवहार नहीं किया जाएगा. अदालत के निर्देश के बाद उसे कैदियों को ले जाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक अलग बस में जेल परिसर लाया गया. बस की सुरक्षा में दो वाहन चल रहे थे.

 

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