सामने आया वो इजरायली मॉडल, जिसके तहत होगी कश्मीरी पंडितों की घर वापसी तथा उन्हें मिलेंगे घर


1990 के दशक में इस्लामिक चरमपंथियों द्वारा कश्मीर में पंडितों पर हुए अत्याचार तथा जुल्मों की कहानी सुनते ही रौंगटे खड़े हो जाते हैं. इस दौरान लाखों कश्मीरी पंडितों को अपना घर मकान दुकान छोडकर कश्मीर से भागना पड़ा था, जो नहीं भागा था उसको चरमपंथियों ने क्रूरता से मौत के घाट उतार दिया था. इसके बाद से कई बार कश्मीरी पंडितों की वापस घर वापसी बातें तो हुई हैं लेकिन कोशिशें शायद नहीं की गईं. जिस कारण आज भी कश्मीरी पंडित अपने ही देश में शरणार्थी की जिन्दगी जीने को मजबूर हैं.

मोदी सरकार आने के बाद इन उम्मीदों को पंख  जरूर लगे हैं लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है. इस बीच अब कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए इजरायली मॉडल सामने आया है. वो इजरायली मॉडल जिसके तहत कश्मीरी पंडितों की घर वापसी हो सकती है. खबर के मुताबिक़, अमेरिका में भारत के एक टॉप राजनयिक ने कहा है कि कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए भारत को कश्मीर में ‘इजरायल मॉडल’ अपनाना चाहिए और कश्मीरी पंडितों को वहां आबाद करना चाहिए. न्यूयार्क में भारत के काउंसल जनरल संदीप चक्रवर्ती ने कश्मीरी हिंदुओं के एक कार्यक्रम में कहा कि अगर इजरायली ऐसा कर सकते हैं तो हम भी कर सकते हैं.

संदीप चक्रवर्ती ने न्यूयॉर्क में कश्मीरी पंडितों के एक कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को हटाने पर भी चर्चा की. इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “मुझे भरोसा है कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के हालात सुधरेंगे, इससे रिफ्यूजियों को वापस लौटने में मदद मिलेगी, ऐसा होता आप अपनी जिंदगी में देख सकेंगे. आप वापस जा सकेंगे…आप अपने घर जा सकेंगे और आप सुरक्षा का एहसास कर सकेंगे, क्योंकि ऐसा होने का दुनिया में एक मॉडल है.”

चक्रवर्ती ने कहा, ”मुझे नहीं पता कि हम इसका अनुसरण क्यों नहीं करते हैं. यह पश्चिम एशिया में हुआ है. अगर इज़राइली लोग यह कर सकते हैं. हम भी यह कर सकते हैं. बता दें कि साल 1967 में वेस्ट बैंक और पूर्वी यरूशलम पर कब्जा करने के बाद से इज़राइल की 140 बस्तियां बस चुकी है. इन बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध माना जाता है. अमेरिका ने हाल में कहा है कि इज़राइली बस्तियों को अब अवैध नहीं माना जाता है. कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए इसी इजरायली मॉडल की चर्चा संदीप चक्रवर्ती ने की.

कश्मीरी पंडितों के साथ मुलाकात के दौरान चक्रवती ने यह भी कहा कि लोग कश्मीरी संस्कृति के बारे में बात कर रहे हैं. एक अतिथि की ओर से इज़राइली मुद्दे और यहुदी मुद्दे पर की गई टिप्पणी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ”उन्होंने अपनी भूमि के बाहर 2000 साल तक अपनी संस्कृति को जिंदा रखा और वे वापस अपनी भूमि गए. मेरे ख्याल से हम सबको कश्मीरी संस्कृति जीवित रखनी चाहिए. कश्मीरी संस्कृति ही भारतीय संस्कृति है. यह हिन्दू संस्कृति है.”

उन्होंने कहा, ”हममें से कोई भी कश्मीर के बिना भारत की कल्पना नहीं कर सकता है.” पांच अगस्त को भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को रद्द कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था. चक्रवर्ती ने कहा कि भारत सरकार सिर्फ संशोधन करने के लिए इतना बड़ा अंतरराष्ट्रीय जोखिम नहीं उठाती. उन्होंने कहा कि यह एक अंतरराष्ट्रीय राजनयिक संघर्ष था लेकिन हमने इसे सफलतापूर्वक रोका.


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