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अब धर्म त्याग कर अधर्म की तरफ़ ले जाना होगा बेहद मुश्किल. मोदी सरकार के नए कानून से झूम उठे संत और पस्त हुए धर्मांतरण के गुनाहगार

वो समय अब गुजरे समय की बात हो जायेगी जब कभी सेवा तो कभी किसी अन्य बहाने से NGO रजिस्टर्ड करवा कर अंत में केवल एक लक्ष्य पर कार्य करना शुरू कर देते थे और वो लक्ष्य होता था ख़ास कर हिन्दुओ को धर्म से विमुख कर के अधर्म की तरफ ले जाना.. उडीसा , पूर्वोत्तर जैसे क्षेत्र इसके प्रत्यक्ष उदहारण हैं .. धीरे धीरे NGO की आड़ में पहले क्षेत्र में जड़ें जमाई जाती थी उसके बाद खेला जाता था धर्मांतरण का बेहद गंदा और खिनौना खेल जिसमे उन्हें आते थे विदेशो से पैसे .

धर्मांतरण की मशीनों के पुर्जो को आख़िरकार कुंद कर देने के लिए मोदी सरकार ने उठाया है बहुत बड़ा कदम.. अब धर्म से अधर्म की तरफ ले जाना हो जाएगा लगभग असम्भव जैसा क्योंकि अब NGO खोलने से पहले बाकायदा उन्हें लिखित रूप से जवाब देना होगा कि वो किसी भी प्रकार की धर्मांतरण जैसी गतिविधियों में शामिल नहीं हैं . कई साहसिक फैसले ले चुका गृह मंत्रालय की इस अधिसूचना में मंत्रालय ने विदेशी चंदा (नियमन) कानून (एफसीआरए) में बदलाव की घोषणा की है।

भारत सरकार ने धर्मातरण को रोकने के लिए विदेशी फंड हासिल करने वाले गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के सभी सदस्यों और पदाधिकारियों को सरकार के समक्ष इस बात की जानकारी देनी होगी वे कभी किसी व्यक्ति के धर्मातरण में शामिल नहीं रहे हैं। इसी के साथ ही एनजीओ के पदाधिकारियों और सदस्यों को यह शपथपत्र भी देना होगा कि वे विदेशी चंदे के दुरुपयोग अथवा राष्ट्रद्रोह और हिंसा को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में शामिल नहीं रहे हैं। भारत सरकार के इस  कदम की आम जनता व साधू समाज ने मुक्त कंठ से प्रशंशा की है..

 

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