हिन्दुओ के नरसंहार की धमकी देने वाले मुफ्ती को सेकुलरिज्म का प्रतीक बता कर गले लगा चुके हैं प्रसिद्ध हिन्दू संत परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज

क्या इसको पृथ्वीराज और मुहम्मद गोरी के घटनाक्रम से जोड़ कर नहीं देखा जा सकता है .. एक हिन्दू संत जिसने अपने धार्मिक सिद्धांतो को पीछे रख कर धर्मनिरपेक्षता की राह पकड़ी थी, ये सोच कर कि उसके हमराही बन रहे बाकी सब भी उनकी तरह सोच और मानसिकता रखते हैं और बाद में वही हिन्दुओ के संहार की धमकी दे .. सवाल ये है कि मुफ़्ती द्वारा दी गई धमकी के दायरे में वो नामी हिन्दू संत आते हैं कि नहीं जो धार्मिक सिद्धांतो को पीछे रख कर धर्मनिरपेक्ष बन गये थे मुफ़्ती रईस को देख कर ..

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मुफ़्ती के दृष्टिकोण से ये बात चल रही है देवभूमि उत्तराखंड के दानव कहे जा सकने वाले मुफ़्ती रईस की जिसने मीडिया से ये कहा कि जा कर बता दो कि मुसलमानों के पास भी हथियार हैं और उनके पास हिंसक लड़ाके हैं . साथ ही चमड़ी उधेड़ने की भी बात साफ़ साफ कही गई है और सीधे सीधे मॉब लिंचिंग का आरोपी हिन्दू समाज को और पीड़ित मुसलमानो को घोषित कर दिया है.. इसी मुफ़्ती को कभी अपनी तरह से सेकुलर मान कर गले लगाया था उन हिन्दू संत ने जो करोड़ों में हैं पूज्यनीय ..

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इन्ही मुफ़्ती के ऊपर कभी विश्वास किया था और इनको शांति का मसीहा बता कर इनके साथ सामूहिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे करोड़ों हिन्दुओ के श्रद्धा केंद्र  परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज .. इन्हें चिदानंद महराज ने अपने साथ ऋषिकेश में होने वाली हिन्दुओ की पवित्र माँ गंगा की आरती में सादर आमंत्रित किया था जिसमे इनके साथ मुफ्ती वजाहत कासिम, अब्दुल बासिद नादवी आदि मौजूद थे जो उस समय सेकुलरिज्म की प्रतिमूर्ति नजर आ रहे थे .

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इस दौरान स्वामी चिदानंद सरस्वती ने इन सब की मौजूदगी में कहा था मां गंगा समेत देश की सभी नदियां, पर्यावरण, पेड़ और बादल सब को समान रूप से छाया, जल और फल देते हैं। इसलिए हम सभी की जिम्मेदारी बनती है कि उनके लिए मिलकर कार्य करें औ कहा था कि गंगा मां है और मां कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं करती. उस समय सबने देखा था कि मुफ़्ती रईस हां में हां कर रहे थे लेकिन उस समय चिदानंद महाराज जी ये नहीं भांप पाए थे कि इस मुफ़्ती के मन में हिन्दुओ के नरसंहार की साजिश चल रही है .

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श्री चिन्दानंद मुनि जी की सहमति से उस समय मुफ्ती वजाहत कासिम ने कहा था कि हम उलेमा व मौलाना साथ मिलकर उत्तराखंड की मस्जिदों के आसपास 500 फलदार पेड़ रोपित करेंगे। कहा कि स्वामी चिदानंद के सानिध्य में सभी उलेमा व अन्य धार्मिक विद्वान साथ मिलकर रिस्पना नदी के पुनरोद्धार की कार्ययोजना तैयार करेंगे। इस मौके पर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने सभी उलेमाओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक रुद्राक्ष व फलदार पौधे भेंट किए थे लेकिन अब संत चिदानंद द्वारा ऐसे मजहबी उन्मादी मुफ़्ती को भेंट किये महादेव शिव के प्रतीक पवित्र रुद्राक्ष के वो पेड़ कहाँ और किस हालात में हैं इसको कोई नहीं जानता है ..

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