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कभी लालू को गिरफ्तार करने के लिए CBI ने मांगी थी भारतीय सेना.. ममता के समर्थन में खड़े तेजस्वी बेहतर जानते हैं सीबीआई की सीमाएं

सीबीआई भले ही संवैधानिक रूप से केन्द्रीय जांच एजेंसी है लेकिन उसकी तमाम सीमायें हैं और उसके कार्य के बाद निष्कर्ष का दबाव भी उच्चतम स्तर का होता है . आज संविधान बचाने के नाम पर धरना प्रदर्शन आदि करते तमाम राजनेता ऐसे भी हैं जिनको कभी गिरफ्तार करने के लिए भारतीय सेना तक की मदद मांगनी पड़ गयी थी . उसी परिवार से आज जो निकल कर सामने आये हैं वो आज ममता बनर्जी के साथ कदम से कदम मिला कर चलते दिख रहे हैं .

सीबीआई के आगे ऐसी स्थितियां नई नहीं हैं . इस से पहले भी वर्ष नब्बे के दशक में इससे भी ज्यादा हैरान करने वाला वाकया हुआ था, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के तत्कालीन जॉइंट डायरेक्टर यू.एन. बिस्वास अतिचर्चित चारा घोटाले की जांच कर रहे थे जिसमे सीधे सीधे लालू यादव की संलिप्तता थी . . साल 1997 की बात है, बिस्वास राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को गिरफ्तार करना चाहते थे. तब राज्य में राबड़ी देवी मुख्यमंत्री थीं.

बिहार के पूर्व सीएम लालू सीबीआई से जबर्दस्त टकराव मोल ले रहे थे. ठीक ममता बनर्जी के अंदाज़ में . उस समय न ही उन्हें संविधान आदि की चिंता थी और न ही किसी प्रकार से धरना प्रदर्शन अदि की . जब लालू के खिलाफ गिरफ्तारी के वारंट को तामील करने में कोई मदद नहीं मिली तो आप सोच नहीं सकते कि बिस्वास ने क्या किया? उन्होंने सीबीआई के पटना स्थ‍ित एसपी से कहा कि वह लालू प्रसाद को गिरफ्तार करने के लिए सेना की मदद लें. इस मसले पर संसद में भी जमकर हंगामा हुआ था. सदन के रिकॉर्ड के मुताबिक तत्कालीन गृह मंत्री इंद्रजीत गुप्ता ने सदन को बताया था कि पटना के सीबीआई एसपी ने दानापुर कैंट के इंचार्ज अफसर को लेटर लिखा था. इसमें उन्होंने लिखा था, ‘पटना हाईकोर्ट के मौखिक आदेश के मुताबिक आपसे यह अनुरोध है कि तत्काल कम से कम एक कंपनी सशस्त्र टुकड़ी सीबीआई पार्टी की मदद करने के लिए भेजें जो पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव के खिलाफ गैर जमानती वारंट को तामील करना चाहती है.’

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