लाश टांग पकड़ कर घसीटी गई थी अखिलेश काल में पुलिस द्वारा और छाती पीटते परिवार पर ही दर्ज कर दिया था FIR.. आज वो माँग रहे न्याय

उस समय भी महिलाए थी और उस समय भी सिन्दूर पोंछ दिया गया था .. अपने पति , भाई आदि की लाश पर चीत्कार कर रहे परिवार को लाठियों से मार मार भगाया गया था और बाद में लाश पर रोना ही गुनाह बता कर के पुलिस के द्वारा दर्ज करवा दिया गया था FIR . अखिलेश काल में पुलिस द्वारा मिले इस सहयोग से कट्टरपंथी भी इतने खुश हुए थे कि शव यात्रा में हुई थी कश्मीरी अंदाज़ में पत्थरबाजी अरु लाश को जलने से पहले खाने पड़े थे पत्थर.. वो लाश जो पहले ही गोली खा चुकी थी .

ये विषय था उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर स्थित टांडा कस्बे का..आज उन्नाव के मामले में महिला समर्थक और अन्याय विरोधी हुए समाजवादी और ख़ास कर अखिलेश यादव के उस समय काल की कल्पना कर के आज भी गुप्ता परिवार के रोंगटे खड़े हो जाते हैं. पहले रामबाबू को मार डाला गया फिर उस निर्मम हत्याकांड के गवाह राधे मोहन को डराने के बाद मार डाला गया .. लाशो पर गुप्ता परिवार को रोने भी नहीं दिया गया था और लाश ले कर प्रदर्शन करने वालों पर ही दर्ज करवा दिए थे थे मुकदमे ..

आज भी उस परिवार से रह रह कर चीत्कार उठती है . वहां कोई आयोग नहीं पंहुचा था , न महिला और न ही मानवाधिकार. शायद इसलिए क्योकि अखिलेश यादव का कार्यकाल सेकुलर कार्यकाल माना जाता था और वर्तमान समय में शासन एक भगवाधारी का है .. तब जीते जी गोली खाने वाले और मरने के बाद पत्थर खाने वाले का नाम रामबाबू था और आरोप था अखिलेश यादव की आँखों के तारे रहे विधायक अजीमुल हक का जिसको उसके ऐसे ही कर्मो के चलते सभी लोग “पहलवान” भी कहते हैं .

सत्ता पक्ष के विधायक कुलदीप सेंगर को किसी भी हालत में क्लीन चिट नहीं मिल सकती और वो कानून के हर प्रक्रिया को बाकायदा झेल रहे है लेकिन क्या मजाल कि अखिलेश यादव के समय काल में उनके चहेते विधायक अजीमुल हक के दरवाजे से भी कोई पुलिस वाला गुजरा रहा हो जबकि पहले रामबाबू और बाद में उनकी हत्या के गवाह राधे मोहन की हत्या के बाद गुप्ता परिवार ने हर FIR में उस विधायक का नाम दर्ज करवाया था . उस समय परिवार की महिलाये रो रो कर बेहोश हो गई थी लेकिन तब न्याय जैसा कोई शब्द नहीं था .

आज योगी आदित्यनाथ सरकार एक एक्सीडेंट तक की CBI जांच करवाने के लिए पल भर में तैयार हो चुकी है लेकिन रामबाबू की हत्या के कई वर्ष बीत जाने के बाद भी CBI शब्द भी कोई बोलने के लिए तैयार नहीं है जबकि आज भी उस परिवार का कहना है कि रामबाबू की आत्मा को तब तक शांति नहीं मिलने वाली है जब तक अजीमुल हक पर कार्यवाही नहीं हो जाती है . रामबाबू के भाई श्यामबाबू गुप्ता जो अभी जीवित बचे हैं, सुदर्शन न्यूज संवाददाता ने जब उनसे उनके मोबाईल नम्बर 9170667777 पर बात की तो उनका कहना था कि उनका परिवार उस अंतहीन अन्याय का शिकार हुआ है जिसकी मिसाल दुनिया के किसी और कोने में नहीं मिल सकती है .

CBI जांच का इंतजार आज भी उस परिवार को है जिसके बाद न सिर्फ अजीमुल हक बल्कि अम्बेडकरनगर के तत्कालीन पुलिस अधिकारियो और अजीमुल हक की जहाँ तक पहुच थी उसके चेहरे भी बेनकाब होंगे.. रामबाबू श्रीराम के भक्त थे शायद उनके लिए अन्य सबकी ख़ामोशी की मुख्य वजह यही हो लेकिन कुलदीप सेंगर के परिवार वाले भी एक बार ये जरूर सोचते होंगे कि अखिलेश यादव के शासन काल में एक अन्य विधायक अजीमुल हक ने ऐसा कौन सा रक्षा कवच पहन रखा था जिसको उत्तर प्रदेश का कानून आज तक नही भेद पाया है .. रामबाबू की विधवा संजू देवी ये जानना चाह रही है कि क्या उन्नाव की पीडिता को न्याय दिलाने के बाद यही लोग उनके लिए भी न्याय की आवाज बुलंद करेंगे या अजीमुल हक का नाम सुन कर उनके नियम , कानून और सिद्धांत बदल जायेंगे ..

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