चीन से 1962 का युद्ध लड़ने वाले सैनिकों की दिल्ली में ये दुर्दशा क्यों ? क्या दोष है उनके परिवारों का ?


भारतीय सेना के उन जांबाजों ने 1962 में चीन के खिलाफ अपनी जान हथेली पर रखकर लड़ाई लड़ी. बड़ी संख्या में भारतीय सेना के जवानों ने इस युद्ध में अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया था लेकिन अपने कदम पीछे नहीं खींचे थे. इस युद्ध में अपनी जांबाजी से दुश्मन के छक्के छुड़ाने वाले सैनिकों को दिल्ली में आवास दिए गये थे. इन सैनिकों के लिए 1968 में दिल्ली के नारायणा इलाके में सैनिक सदन बनाया गया था तथा 24 सैनिकों को ये प्रदान किये गये थे.

लेकिन अब देश की राजधानी दिल्ली के नारायणा इलाके में साल 1968 से बसे सैनिक सदन के लगभग 24 परिवार इन दिनों खौफ के साये में जीने को मजबूर है. खौफ किसी और चीज का नहीं बल्कि 52 साल से जिस आशियाने में वो अपनी जिंदगी बिताते आ रहे हैं उस आशियाने को छिनता देखने का खौफ सता रहा है. ये लोग कोई आम लोग नहीं बल्कि इनके परिवार वालों ने सन 1962 और सन 1965 की लड़ाई में अपना योगदान दिया है. जिसके बाद इन लोगों को 1968 में 24 सरकारी फ्लैट राज्य सैनिक बोर्ड की तरफ से दिए गए थे.

इन सरकारी फ्लैट में एक्स आर्मी मैन और उनके परिवार वाले रह रहे हैं लेकिन 1968 से लगभग 52 साल बीत जाने के बाद आज इन लोगों को राज्य सैनिक बोर्ड की तरफ से 24 घंटे में मकान खाली करने का नोटिस थमा दिया गया है. बता दें कि नारायणा के सैनिक सदन में लगभग 2 सोसाइटी हैं जिनमें 24 फ्लैट सेल हैं. इन 24 वर्षों में तकरीबन 125 के आसपास एक्स आर्मी मैन के परिवार वाले रह रहे हैं जिनको सन 1968 में एक्स आर्मी मैन होने के नाते आवंटित किए गए थे. तभी से एक्स आर्मी मैन और उनके परिवार वाले इन फ्लैटों में रह रहे हैं.

अब अचानक से इन परिवारवालों को राज्य सैनिक की तरफ नोटिस दिया गया है. इसके बाद मकान खाली करने को लेकर यह लोग परेशान हैं. पिछले 52 साल से रामकुमार टंडन और उनके भाई राकेश कुमार टंडन सैनिक सदन में रह रहे हैं. यह फ्लैट उनके पिता राजकुमार टंडन जो कि एक्स आर्मी ऑफिसर थे उनको एलॉट किया गया था. सन 1962 और 1965 की लड़ाई में उनका एक बड़ा योगदान था. इस योगदान के लिए उनको कई दर्जन भर मेडल भी मिले लेकिन आज उनका पूरा परिवार अपने पिता की कमी महसूस कर रहा है. क्योंकि जो मकान उनके पिता को परिवार वालों के साथ रहने के लिए दिया गया था उसको अब राज्य सैनिक बोर्ड की तरफ से खाली कराने का आदेश दिया गया है.

रामकुमार टंडन का कहना है कि यह मकान पिछले कई सालों से उनके पास है और साल 2017 में उपराज्यपाल की तरफ से उनको इजाजत भी मिल गई थी. बावजूद इसके उनको अब नोटिस थमा दिया गया है. यह लोग अब एक बार फिर कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाह रहे हैं. यही हाल कुछ अनुपमा अरोड़ा का भी है. अनुपमा अरोड़ा के पिता को यह फ्लैट बतौर एक्स आर्मी मैन होने के चलते दिया गया था. उनके भी पिता का 1962 की लड़ाई में एक अहम योगदान था.

लेकिन अनुपमा की माने तो जो नोटिस रातों रात उनको खाली करने का आदेश दिया गया है, जिससे उनकी रातों की नींद उड़ गई है. अपने परिवार और अपने बच्चों के साथ रहती हैं. लेकिन नोटिस मिलने के बाद वह यह सोच रही हैं कि आखिर वह जाएं तो जाएं कहां. आए दिन पुलिस और प्रशासन के लोग उनको मकान खाली करने का आदेश दे रहे हैं. इन पूर्व सैनिकों के परिवार वालों की सरकार से यही मांग है कि वो उनके आशियाने को इनसे ना छीने.


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