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सुदर्शन वायरल चेक- क्या सच में कुलदीप सेंगर मामले में बाराबंकी पुलिस से सवाल पूछने वाली छात्रा ने स्कूल जाना छोड़ दिया है ?

पिछले कुछ समय से एक खबर लगातार वायरल हो रही है कि उन्नाव रेप पीडिता मामले में सवाल उठाने वाली लड़की इतनी दहशत में आई कि उसने धमकियों के चलते स्कूल जाना ही छोड़ दिया है.. इतना ही नहीं इस मामले में कक्षा 11 में पढने वाली उस लडकी के परिजनों के बयान छापे जाने लगे कि वो जल्द ही स्कूल के प्रिंसिपल से मुलाक़ात करेंगे और उसके बाद निर्धारित करेंगे कि वो अपनी बेटी को स्कूल भेजेंगे कि नहीं .. इस बच्ची के सवाल सोशल मीडिया में काफी वायरल भी हुए ..

ये मामला बाराबंकी जनपद का है . यहाँ पर बाराबंकी जनपद उत्तरी के एडिशन सुपरिंटेंडेंट ऑफ़ पुलिस रामसेवक गौतम बालिका सुरक्षा जागरूकता अभियान के तहत एक स्कूल में गये थे जहाँ पर एक बच्ची ने ये सवाल किया .. बच्ची ने कहा था कि अगर कोई साधारण व्यक्ति के खिलाफ आवाज उठाई जाय तो ठीक है लेकिन अगर किसी बड़े नेता के खिलाफ यही आवाज उठाई जाए तो क्या आवाज उठाने वाले का भी हाल उन्नाव पीडिता के जैसा ही होगा ?

इस मामले में तमाम समाचार माध्यमो ने केवल इतना कहा कि एडिशनल एस पी ने चुप्पी साध ली .. लेकिन जब इस मामले की पड़ताल की गई तो शुरुआत से ही कई सवाल खड़े होते दिखाई दिए जो इस प्रकार की खबरें वायरल करने वालों की मंशा पर ही सवाल उठाते दिखाई दिए.. इसमें सबसे ज्यादा मौके की नजाकत देख कर अपनी अपनी रोटी सेंकने की मानसिकता सामने आई क्योकि जब जमीनी पड़ताल की गई तो सच वो नही निकला जो जबरन प्रचरित किया जा रहा..

इस मामले मे सबसे पहले ये जानने योग्य है कि जनपद बाराबंकी महिला विरुद्ध अपराध में बाकी अन्य जिलो से कहीं बेहतर पायदान पर है और महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से काफी सुरक्षित माना जाता है. नवागत पुलिस अधीक्षक आकाश तोमर के तमाम अतिरिक्त प्रयासों ने माहौल को काफी बदला है और जनपद बाराबंकी में कोई ऐसी बड़ी घटना पिछले दिनों में सामने नहीं आई जो किसी भी प्रकार से इस दावे को कम से कम बाराबंकी जनपद में मजबूत आधार दे पाए ..

इसी मामले में दूसरा सबसे खास पहलू ये है कि “उन्नाव मामले में पुलिस से सवाल करने वाली लड़की ने डर से स्कूल जाना छोड़ा”  जैसी हेडलाइन दे कर बड़ी बड़ी खबरें छपने वालों ने कहीं भी पुलिस का वर्जन नहीं छापा… अमूमन महिला सुरक्षा से जुड़े ऐसे मामले में पुलिस का वर्जन जरूरी होता है लेकिन जब किसी साजिश के तहत कोई अफवाह उडानी हो तो उसमे इसी प्रकार के दांवपेंच अपनाए जाते हैं .. फिलहाल पुलिस वर्जन के बिना खबर निश्चित रूप से भ्रामक और आधारहीन ही कही जायेगी.

एक और तथ्य के अनुसार इसी मामले में ये कहा जा रहा है कि बालिका के सवाल सुन कर एडिशनल एस पी रामसेवक गौतम खामोश हो गए थे और उन्होंने चुप्पी साध ली थी.. लेकिन असल में ये सच नहीं है, बालिका के सवालों को सुन कर एडिशनल एस पी ने सोच समझ कर उत्तर देने के लिए थोडा समय जरूर लिया पर उन्होंने बताया कि अगर आप ने टोल फ्री नम्बर पर सम्पर्क किया तो कोई भी हालात क्यों न हो और सामने कोई भी क्यों न हो, पुलिस आपकी मदद जरूर करेगी ..

इस मामले में एक तथ्य और भी सामने आ रहा है कि बच्ची की सुरक्षा न होने के चलते स्कूल छोड़ देने का दावा करने वाले कई समाचार माध्यमो ने खुद से ही बच्ची की फोटो को चारो तरफ वायरल किया और अपनी खबरों के मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया .. एक तरफ वो बच्ची को असुरक्षित घोषित करने का प्रयास कर रहे थे तो दूसरी तरह उसकी फोटो को लगातार वायरल कर रहे थे .. अब इस दोहरे मापदंड के बाद सवाल उठता है कि बच्ची की सुरक्षा खतरे में डालने वाले कौन थे ? और जो बच्ची पुलिस के आगे इतनी निर्भीकता से अपने अधिकार के तहत सवाल कर रही थी उसको बाद में सोची समझी साजिश के तहत डरा सहमा क्यों घोषित किया गया ?

रही बात बालिका के स्कूल छोड़ देने का तो इस मामले में जब बाराबंकी पुलिस से जानकारी ली गई तो पता चला कि ये भी एक भ्रामक खबर है. पुलिस और प्रशासन के उच्चाधिकारियों ने स्वयं उस बालिका के घर जा कर मुलाकात की और पूरी जानकारी ली तो पता चला कि बालिका की तबियत कुछ खराब हो गई थी जिसके चलते बालिका ने फिलहाल के लिए अवकाश पर है .. बालिका के परिजनों ने बताया कि स्वास्थ्य ठीक हो जाने के बाद वो फिर से यथावत स्कूल जाना शुरू कर देंगी .

इस सच को बाराबंकी पुलिस ने खुद अपने आधिकारिक ट्विटर पर डाला है लेकिन इसके बाद भी उन तमाम समाचार माध्यमो ने उसको अपनी खबरों में स्थान देना उचित नहीं समझा है . यहाँ तक कि खुद बाराबंकी पुलिस इस प्रकार से खबरों को डाल रहे हैंडलो के नीचे जा कर उनको सच बता रही है . चंदौली पुलिस के खिलाफ “जय श्री राम” वाली अफवाह में पूर्ण असफल साबित होने के बाद एक नया पैंतरा अपनाने वालों ने अब बाराबंकी पुलिस को अपनी निराधार खबरों के जाल में लपेटना चाहा है.

लेकिन इसका सच सबके सामने सच्चे रूप में आ रहा है .. शासन और प्रशासन को आधारहीन और तर्कहीन रूप से बदनाम करने और अपने तुच्छ स्वार्थो की पूर्ति के लिए कभी श्रीराम के नाम पर तो कभी बच्चियों को हथियार बना कर अफवाह उड़ाने वालों पर जिस प्रकार से उत्तर प्रदेश पुलिस ने नजर बनाए रखी है उसकी हर तरफ सराहना की जा रही है . एकदम नीचे देखिये आधिकारिक ट्विटर हैंडल से बाराबंकी  पुलिस का इस मामले में स्पष्टीकरण .. –

 

रिपोर्ट – 

राहुल पाण्डेय 

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज 

मुख्यालय नोएडा 

मोबाइल – 9598805228


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