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पवित्र वेदों, रामायण व श्रीमद्भागवत गीता का विरोध करने वाले अर्बन नक्सली अपने घरो में रखते थे ये किताब.. जानिए किस के भक्त थे वो वामपंथी ?


ये वही लोग हैं जिनके नाम से अक्सर हिन्दू समाज गुमराह हो जाया करता था और उन्हें लगता था कि ये भी नाम के अनुसार सनातनी होगा और धर्म देश अदि की अन्य सनातनियो की तरह चिंता करता होगा .. लेकिन असल में ये एक अलग मत के थे जिसको धर्म नहीं बल्कि अधर्म कहना गलत नहीं होगा.. इन्होने हिन्दू नाम का चोला केवल जनमानस को गुमराह कर के उन्ही के बीच रहते हुए अपने अन्दर का जहर सबमे फैलाने के लिए धारण किया था .. लेकिन सरकार की दृढ निश्चय शक्ति ने सब बेनकाब कर दिया .

एजाज घूम-घूम कर बेचता था कपड़े और महिलायें बिठाती थी उसे घर में.. उन्हें पता ही नहीं था कि वो क्या करने वाला है ?

ये वो लोग थे जो आये इन पवित्र रामायण , श्रीमद्भागवत गीता व वेदों को गलत मानते हैं और हिन्दू देवी देवताओं के अपमान को चुपचाप देखते और सुनते थे लेकिन लेनिन की मूर्ति के लिए सडको पर आ जाया करते थे . अब इनसे अदालत ने सवाल किया है जिसका जवाब इनको देना ही पड़ेगा . ये वो लोग हैं जिन्होंने एक बाकायदा मुहिम चला कर खुद को अर्बन नक्सली घोषित कर दिया था और सीधे सीधे प्रधानमन्त्री तक के खिलाफ साजिश रचते हुए पाए थे ..ये समाज की शांति के दुश्मन भी कहे जा सकते थे .

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ये मामला है भीमा कोरेगांव से जुड़ा हुआ जिसमे हिरासत में लिए गये हैं उसके साजिशकर्ता.. उन साजिशकर्ताओ का देश की सभ्यता और संस्कृति से कोई वास्ता फिलहाल तो नहीं दिखाई दे रहा है क्योंकि उनके आदर्शो में विदेशी हुआ करते थे.. एल्गार परिषद-भीमा कोरेगांव मामले के आरोपी वी. गोन्जाल्विस की जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही मुंबई उच्च न्यायलय ने ने पूछा है कि उन्होंने अपने घर पर लियो टॉल्सटाय की किताब ‘वार एंड पीस’क्यों रखा हुआ है. ?

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हाईकोर्ट ने गोन्जाल्विस के घर से जब्त जिन पुस्तकों और सीडी का जिक्र किया है, उनमें सीडी राज्य दमन विरोधी, मार्क्सिस्ट आर्काइव्स, जय भीमा कामरेड और लियो टॉलस्टाय की साहित्यिक कृति, वार एंड पीस, अंडरस्टैंडिंग माओइस्ट, आरसीपी रीव्यू और नेशनल स्टडी सर्किल द्वारा जारी परिपत्र की प्रतियां भी शामिल हैं. पुलिस ने दावा किया था कि परिषद में 31 दिसंबर 2017 को दिए गए भड़काऊ भाषणों की वजह से अगले दिन पुणे जिले के भीमा-कोरेगांव गांव के आसपास जातीय हिंसा भड़की थी

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