जो शौकत बहुत पहले ही सेना छोड़ कर भाग गया था उसको हीरो बनाने पर तुले थे कुछ लोग ..

जब भारत के खिलाफ चीन जैसे देश खुल कर अन्तराष्ट्रीय मंचो पर अपने मन में भरा जहर दिखा रहे हैं तब ठीक उसी समय भारत देश के ही अन्दर भारत के ही पैसे से फल फूल रहे मीडीया के एक वर्ग ने भारत के खिलाफ ही साजिश रचना शुरू कर दिया था . इस साजिश में उनके निशाने पर सबसे जायदा भारत की सेना और सैनिक थे . जहाँ उन्ही सैनिको के खिलाफ शसस्त्र आतंकियों ने हमला कर रखा है तो वहीँ मीडिया के एक खास वर्ग ने भी अपनी कलम और कैमरे उनके खिलाफ ही घुमा रखे हैं .

ज्ञात हो कि एक और बड़ी साजिश बेनकाब हुई है मीडिया के एक ख़ास वर्ग की . कुछ ही दिन पहले दुर्दांत आतंकी अफजल गुरु के बेटे को जबरन देशभक्त साबित करने में बेनकाब हो चुकी वही मीडिया का ख़ास वर्ग अब एक सेना को बहुत पहले ही छोड़ कर भाग चुके और फ़ौज से भगोड़ा साबित हो चुके युवक को तब जबरन सैनिक बताने लगी जब उसकी हत्या संदिग्ध हालातों में कर दी गयी . हालत यहाँ तक हुए कि इस दुष्प्रचार के बाद सेना को सफाई तक देनी पड़ी .

सबूत मांगने के दौर में सफाई भी देने के हालात को आराम से एक बड़ी साजिश के रूप में समझा जा सकता है देश की रक्षा कर रहे जवानों के खिलाफ . ज्ञात हो कि सेना ने जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आज उसके एक जवान की संदिग्ध आतंकवादियों द्वारा उसके घर के बाहर हत्या की रिपोर्टों पर कहा है कि शौकत अहमद नायक नाम का यह रंगरूट ट्रेनिंग के दौरान ही सेना छोड़ कर चला गया था और उसे गत वर्ष 17 सितम्बर को ही भगौड़ा घोषित कर दिया गया था। सेना का कहना है कि तकनीकी तौर पर जो रंगरूट ट्रेनिंग के दौरान सेना छोड़ देता है वह सैनिक नहीं बल्कि शहरी नागरिक ही कहलाता है। सेना में पूर्व रंगरूट जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।उसने कभी जवान के रूप में शपथ नहीं ली क्योंकि वह रंगरूट की ट्रेनिंग के दौरान ही सेना छोड़कर चला गया था।

उसी ख़ास वर्ग की मीडिया की रिपोर्टों में कहा गया था कि बुधवार को पुलवामा में सेना के जवान शौकत अहमद नायक को संदिग्ध आतंकवादियों ने उसके घर के बाहर लाकर गोली मार दी थी। सेना के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि रंगरूट शौकत अहमद नायक सुपुत्र मोहम्मद युसूफ नायक गत वर्ष 17 सितम्बर से भगौड़ा घोषित है। वह 15 जनवरी 2018 को प्रादेशिक सेना में भर्ती हुआ था बाद में 21 मार्च 2018 को उसे जम्मू एंड कश्मीर लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था। वह पुलवामा का रहने वाला था और 14 सितम्बर को तीन दिन की छुट्टी लेकर गया था जिसके बाद वह वापस नहीं लौटा।

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