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Reason Of Result – योगी पर निशाने के लिए बचा था केवल “छुट्टा सांडो” का मुद्दा.. ? योगी नहीं बल्कि जनता ने दिया जवाब


चुनाव पूर्व सुदर्शन न्यूज से अपने विशेष साक्षात्कार में योगी आदित्यनाथ एकदम शांत , सहज और निश्चिंत लग रहे थे.. उनको ले कर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे थे .. उनके नेत्रित्व पर ऊँगली उठाने के साथ कुछ राजनैतिक जानकार उत्तर प्रदेश चुनावों को उनकी अग्नि परीक्षा बता रहे थे.. कुछ ने उत्तर प्रदेश में अलग अलग अनुमानित सीटों की बात कही थी जिसमे से कुछ ३० कुछ ४० और अधिकतम 50 आदि की बात किया करते थे लेकिन उन सभी को दिया योगी नहीं बल्कि जनता ने जवाब .

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विदित हो कि प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के बाद अगर किसी राज्य के मुख्यमंत्री इस बार विरोधियो के सबसे ज्यादा निशाने पर रहे तो वो थे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ.. भले ही उनके खिलाफ मुद्दे तलाशे गये हों लेकिन हैरानी की बात ये है कि देश का प्रधानमन्त्री चुनने के लिए हो रहे इन चुनावों में योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सबसे बड़ा मुद्दा बनाया गया था आवारा और छुट्टा सांडो का.. यद्दपि इस मुद्दे पर भी सुदर्शन न्यूज ने योगी आदित्यनाथ से विशेष साक्षात्कार में जवाब माँगा था .

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निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश से आई भाजपा की 62 सीटों के बाद ये जनता का जवाब रहा कि वो विपक्ष के छुट्टा सांडो के मुद्दे से सहमत नहीं हैं . उत्तर प्रदेश में अवैध कत्लखाने बंद होने के बाद से योगी आदित्यनाथ के खिलाफ ऐसे आरोप लगाए जाने लगे थे जिस से वो खुद वाकिफ थे .. इतना ही नहीं गौ वंश की कटाई को सख्ती से रोका गया उत्तर प्रदेश में जिस से गौ वंश का संरक्ष्ण हुआ पर इसको भी कुछ लोगों ने नकारात्मक रूप दे कर उठाया .  यहाँ तक कि जिस रैली में पुलिस का सिपाही एक सांड से लड़ा उस सिपाही की तारीफ करने के बजाय उसी फोटो का मजाक उड़ाया गया..

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इसके अलावा जो अन्य मुद्दे थे उसमे उत्तर प्रदेश का कानून व्यवस्था का विषय मुख्य था.. इस बार किसी ने भी उत्तर प्रदेश में गरीबी , महगाई , बेरोजगारी आदि विषयों को आगे नहीं रखा .. इसके अलावा योगी आदित्यनाथ के हिंदूवादी वेशभूषा और कार्यों का भी मजाक उडाना जनता को पसंद नहीं आया जिसमे अखिलेश यादव द्वारा मुख्यमंत्री आवास को धुलवाने आदि को विषय बनाया गया था .. लेकिन कुचल मिला कर इन तमाम तथ्यों को देख कर ये कहा जा सकता है कि विपक्ष दिशाहीन तो दूर मुद्दा विहीन था और उसके कुछ मुद्दों से जनता किसी भी रूप में सहमत नहीं दिखी .

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