मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व वाईस चांसलर जमीरउद्दीन शाह का बयान -“सुप्रीम कोर्ट अगर मस्जिद का आदेश दे भी दे तो भी अब वहां मस्जिद बनना असंभव है”..फिर मुसलमानों को दी एक नेक सलाह

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) जमीरउद्दीन शाह ने कहा है कि अयोध्या भूमि विवाद में अगर फैसला मुसलमानों के पक्ष में आता है तो भी देश में शांति बनाए रखने के लिए मुसलमानों को भूमि हिंदू भाइयों को सौंप देनी चाहिए। उन्होेंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट को स्पष्ट निर्णय देना चाहिए, यह पंचायती बिल्कुल नहीं होना चाहिए। जमीरउद्दीन शाह ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट मुसलमानों के पक्ष में निर्णय देता है, तो क्या वहां मस्जिद बनाना संभव होगा?

यह असंभव है। यदि निर्णय मुसलमानों के पक्ष में आता है तो देश में स्थायी शांति के लिए मुसलमानों को भूमि हिंदू भाइयों को सौंपनी चाहिए। ये वो नेक सलाह है जिसको इस से पहले भी कई लोगों ने दी थी लेकिन श्रीराम के खिलाफ बाबर की पैरवी करने वाले कईयों ने इसको अनसुना कर दिया..हाईकोर्ट के आदेश को मानने की दलील देने वालों ने मामले को सुप्रीम कोर्ट तक खींचा और बीच मे इकबाल अंसारी के एक स्टिंग में तो यहां तक आया कि अगर अदालत भी निर्णय दे तो भी वहां मन्दिर की एक ईंट भी नही रखने दी जाएगी..

शाह ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट मुसलमानों के पक्ष में निर्णय देता है, तो क्या वहां मस्जिद बनाना संभव होगा? एक समाधान होना चाहिए, अन्यथा हम लड़ते रहेंगे। मैं अदालत के निपटारे का पुरजोर समर्थन करता हूं।आपको बता दें कि अयोध्या जमीन विवाद के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट रोजाना सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने सभी पक्षों को कहा है कि वह इस मामले पर बहस 17 अक्टूबर तक पूरी करे. अब 14 अक्टूबर को मुस्लिम पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन बहस करेंगे जबकि बाकी सभी पक्षकार 15-16 अक्टूबर को दलीलें देंगे. सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच अभी तक सभी पक्षों की दलीलें सुन चुकी है।

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