बाबर के पैरोकारों को सेकुलर बताने वालों की साजिश बहुत कम समय में हुई बेनकाब.. ये बोला बाबरी का मुद्दई जिसे अपने वाहन में बैठा कर अदालत ले जाते थे सेक्युलर संत


सुबह से एक अफवाह उड़ रही है एक खास वर्ग के द्वारा कि मुस्लिम पक्ष अर्थात बाबर के पैरोकार तैयार हो गये हैं अयोध्या की भूमि से अपना दावा छोड़ने के लिए और उन्होंने कुछ शर्तो के साथ समझौते की पेशकश की है.. इस खबर के साथ एक खास वर्ग जो अक्सर हिन्दुओ के विरोध को ही देश की नीति का मसौदा समझता है , वो एक्टिव हो गया और इसका जोर शोर से ये जताते हुए प्रचार किया जाने लगा कि बाबर के पैरोकार धर्मनिरपेक्ष हैं और मन में कुछ और भी साजिश थी आगे के लिए.

जब इस मामले ने तूल पकड़ा तो आखिरकार सामने आने लगे वो तमाम बयान जिसके बाद पता चला की ये एक सोची समझी साजिश है और अफवाह है एक पक्ष को महान बना कर दूसरे पक्ष को जिद्दी समझाने की.. ठीक यही नीति अपनाई गई थी बालाकोट मामले में जब भारत से ही कई लोग इमरान खान के गुण गाने लगे थे और मोदी को कटघरे में खड़ा करने लगे थे. इस बार भी लगभग वही लोग शामिल थे जिन्हें उस समय इमरान गैंग कहा गया था और अब वो तमाम लोग बाबर गैंग में शामिल हो गये..

इस झूठ का पर्दाफाश खुद बाबरी के मुद्दई इक़बाल अंसारी ने किया .. इनके अब्बा को अपने साथ कार में बैठा कर अयोध्या के सेक्युलर संत अपने साथ भगवान श्रीराम के खिलाफ मुकदमा लडाने ले जाया करते थे.. आर्थिक मदद भी किया करते थे और उनके अब्बा की मौत पर वही सेक्युलर संत फूट फूट कर रोये भी थे.. अब उन्ही की सन्तान इस बार पर अड गई है की कहीं भी किसी भी प्रकार का कोई भी समझौता नहीं हुआ है और कोई भी जमीन छोड़ने की बात पूरी तरह से निराधार है .

इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट के मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी के वकील एम.आर. शमशाद ने एक बयान जारी कर कहा है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जमीन पर दावा छोड़ने की बात नहीं की है, ये सभी अफवाहें चल रही हैं। यहाँ पर ये ध्यान रखना जरूरी है की सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की रोजाना सुनवाई प्रारंभ होने से पहले अदालत ने मध्यस्थता का ऑप्शन दिया था। लेकिन इसपर किसी पक्ष की सहमति नहीं बन सकी थी।मुस्लिम पक्ष की ओर से कुल 6 पार्टियां ये केस लड़ रही हैं, इनमें से सुन्नी वक्फ बोर्ड एक पार्टी है।


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