तथाकथित बुद्धिजीवियों द्वारा पुलिस के झूठे सम्मान का आवरण हटा.. कॉमनहेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटीव संस्था की रिपोर्ट में पुलिसकर्मियों पर लगाये गए ऐसे आरोप जो सत्य से हैं कोसों दूर

बुलंदशहर हिंसा के बाद तथाकथित बुद्धिजीवी पुलिस के प्रति जो सम्मान तथा आदर का भाव दिखाते हुए नजर आ रहे थे, उनके उस झूठे सम्मान तथा आदर का आवरण हटता हुआ नजर आ रहा है. कॉमनहेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटीव  नामक एक संस्था ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस के जवानों पर ऐसे सनसनीखेज आरोप लगाये हैं जो न सिर्फ हकीकत से कोसों दूर हैं बल्कि पुलिस के जवानों का मनोबल कम करने वाले भी हैं. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि तिलकधारी पुलिसवालों से मुस्लिम समाज के लोगों में डर बढ़ रहा है.

पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला और QUILL के नेतृत्व वाले कॉमनहेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटीव (सीएचआरआई) ने 50 पेज की रिपोर्ट जारी की है, जिसमें देश के मुसलमानों को लेकर पुलिस वालों में मौजूद कई तरह के पूर्वाग्रह का जिक्र किया गया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे पुलिस मुस्लिम बहुल्य इलाकों को ‘मिनी पाकिस्तान’ जैसा समझती है. इस रिपोर्ट में पुलिस थानों में हिन्दू धार्मिक प्रथाओं और प्रतीकों के निरंतर प्रदर्शन को लोकल इन्फॉर्मर नेटवर्क्स के लिए हानिकारक बताया गया है और इस कारण मुस्लिम समुदाय खुद को अलग-थलग महसूस करता है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस मुसलमानों को उनकी पहचान के आधार पर टार्गेट और प्रताड़ित करती है. कई बार अल्पसंख्यक समुदाय को बिना किसी सबूत के ही अपराधी बना दिया जाता है. उन्हें लगातार डरा धमकाकर रखा जाता है.  रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम महिलाओं को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि पुलिस जब हमें बुर्का या हिजाब पहने देखती है तो उनका रवैया तुंरत बदल जाता है. अहमदाबाद की एक मुस्लिम महिला ने बताया कि ‘पुलिसकर्मियों को जब पता चलता है कि हम मुस्लिम बहुल्य इलाके से हैं, तो वे हमें अपमानित करने लगते हैं. कई बार हमें न जाने पर धमकाया भी जाता है. एक बार तो उन्होंने यह भी कहा कि ‘बुर्का निकालो, बम लेकर आई हो क्या?’

सीएचआरआई की इस रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम समुदाय के कई लोगों को पुलिस से किसी चीज़ को लेकर शिकायत करने में भी डर लगता है. वह पुलिस थानों में खुद को अलग-थलग और असुरक्षित महसूस करते हैं. वहीं इस रिपोर्ट में मुंबई के एक व्यक्ति के हवाले से लिखा गया है कि पिछले दो-तीन वर्षों में पुलिसकर्मियों के बीच तिलक लगाने और गाड़ियों में हिन्दू देवताओं की फोटो लगाने का चलन बढ़ा है. ये धार्मिक प्रतीक हमें इन लोगों से अलग महसूस कराते हैं. इसके अलावा रिपोर्ट में पुलिस थानों में होने वाले ‘शनि पूजा’, हथियारों की पूजा आदि के बारे में भी जिक्र किया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, लोगों से बातचीत में यह बात भी पता चली कि स्थानीय पुलिस द्वारा मुस्लिम समुदाय के बीच मुखबिरों को भेजने का चलन ज्यादा बढ़ गया है और इनमें ज्यादातर मुखबिर मुस्लिम ही होते हैं. एक व्यक्ति ने यह भी बताया कि कैसे सभा के बीच होने वाले भाषण को किसी मुखबिर ने इलाके के एसएचओ को मोबाइल पर लाइव दिखाया था.  सीएचआरआई और QUILL ने अल्पसंख्यक मामले के मंत्रालय द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समूह द्वारा तैयार किए समान अवसर आयोग बिल को बिना किसी देरी के संसद में पेश करने का सुझाव दिया है. इसके अलावा रिपोर्ट में पुलिस में और मुस्लिमों को शामिल करने की भी बात कही गई है.

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