जिस हुर्रियत को जमीन सुंघा दी है INA ने.. जानिये 370 हटने के बाद क्या होगा उसका ?

जम्मू कश्मीर के अलगवादी संगठन हुर्रियत के नेता, जो भारत से तमाम सुविधाएं लेकर भारत के ही खिलाफ जहर उगलते हैं, भारत के खिलाफ साजिशें रचते हैं तथा पाक परस्ती करते हैं.. उन हुर्रियत के नेताओं को राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA पहले ही जमीन सुंघा चुकी है. अब जब जम्मू कश्मीर से धारा 370 हट चुकी है, जम्मू कश्मीर का नक्शा बदल चुका है तथा जम्मू कश्मीर लद्दाख से अलग होकर केंद्र शासित प्रदेश बन चुका है, तब ये जानना भी जरूरी है कि अब जम्मू कश्मीर में अलगाववादियों का क्या होगा ?

इसके लिए आपको बता दें कि धारा 370 के तहत कश्मीर को जो विशेषाधिकार मिलते थे, वो अब नहीं मिल पाएंगे. ऐसे में अब घाटी में बहुत कुछ बदल जाएगा. अलगाववादी अब ज्यादा कुछ नहीं कर पाएंगे, साथ ही अगर पाकिस्तान कश्मीर मसले पर अड़ंगा लगाना भी चाहेगा तो उसे सीधे तौर पर केंद्र सरकार से बात करनी होगी. बता दें कि भारत का रुख कश्मीर के मसले पर हमेशा एक ही रहा है कि वह पाकिस्तान से तभी बात करेगा जब आतंकवाद के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा.

लेकिन इसके बावजूद जब भी भारत और पाकिस्तान किसी भी मसले पर एक मंच पर आते थे तो अलगाववादी घाटी में बंद का माहौल बनाते थे और राज्य सरकार के समर्थन से अलग-अलग जगह प्रदर्शन करते थे. लेकिन अब जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश बन जाएगा यानी वहां की कानून व्यवस्था सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के हाथ में होगी. केंद्र सरकार पहले ही अलगाववादियों पर सख्त रही है, ऐसे में इस नए नियम के साथ ही अलगाववादियों के लिए मुश्किलें बढ़ती जाएंगी. पाकिस्तान पहले कई बार अलगाववादियों से बात करने की बात कह चुका है. पाकिस्तानी उच्चायुक्त भी हर मसले पर अलगाववादियों को दावत का न्योता देते रहते थे, लेकिन अब ऐसा करना मुश्किल हो पाएगा.

क्या होगा अलगाववादियों का–

जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों की स्थिति कमजोर होगी.

-क्षेत्रीय पार्टियां भी केंद्र के फैसले में ज्यादा अड़ंगा नहीं लगा पाएंगी.

-जम्मू-कश्मीर की कानून व्यवस्था सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के हाथ में होगी, यानी अलगाववादियों और पत्थरबाजों के लिए अब मुश्किल बढ़ती ही जाएगी.

-पाकिस्तान को अगर इस मसले पर बात करनी होगी तो सीधे तौर पर केंद्र से ही बात होगी और किसी भी तरह अलगाववादी इस मुद्दे में अपना अड़ंगा नहीं लगा पाएंगे.

-क्योंकि अब UAPA बिल लागू हो गया है, ऐसे में जो भी व्यक्ति आतंकवादियों की मदद करने की कोशिश करेगा तो NIA सीधे तौर पर उन पर शिकंजा कस पाएगा.

-पहले कई बार ऐसा देखा गया है कि राज्य सरकार अपनी पुलिस के जरिए पत्थरबाजों को छूट देती थी और सेना के लिए मुश्किलें खड़ी करती थी. लेकिन अब जब केंद्र के हाथ में राज्य की पुलिस होगी तो ये मुश्किलें भी दूर हो पाएंगी.

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