हिन्दू धर्म विवाह को मानता है जन्म जन्मान्तर का पवित्र बंधन. लेकिन इस्लाम में निकाह क्या है ? इसे बताया ओवैसी ने..

सेकुलर मान्यता ये कहती है कि सभी धर्म समान होते हैं, इस धर्मनिरपेक्ष मान्यता के अनुसार सब मत और मजहबो में एक ही चीज एक जैसी लिखी और मानी गई है . लेकिन जब ओवैसी ने तीन तलाक के मुद्दे पर मुस्लिमो में निकाह को पारिभाषित किया तो कई लोगों को एक बार चौंकना पड़ा , ख़ास कर जो सेकुलर विचारधारा के थे बिना गहराई तक सच को जाने हुए . शायद भारत पहली बार जान पाया है कि विवाह और निकाह दो अलग अलग विधान हैं दो अलग अलग धर्म और मतो में ..

विदित हो कि अगर बात हिन्दू परम्परा की हो तो आदि काल से विवाह को एक पवित्र बंधन मान कर पति पत्नी को यही बताया जाता है कि आप दोनों जन्म जन्मान्तर के रिश्ते में बंध गए . पति और पत्नी दोनों अग्नि , अन्य देवी देवताओं व अपने परिजनों को साक्षी मान कर एक दूसरे का साथ जन्म जन्मान्तर तक निभाने का वादा भी करते है . लेकिन पति और पत्नी के मिलने की इसी परम्परा को इस्लाम के नजरिये से देखा जाय तो ओवैसी के हिसाब से ये कुछ और ही नहीं .

तीन तलाक मुद्दे पर संसद के अंदर बोलते हुए ओवैसी ने इस्लाम में निकाह को पारिभाषित किया है .  एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने तीन तलाक बिल पर लोकसभा में बहस के दौरान कहा कि इस्लाम में शादी एक कॉन्ट्रैक्ट है, जन्म-जन्म का साथ नहीं है. मतलब एक मुसलमान शौहर अपनी बीबी से जन्मजन्मान्तर का रिश्ता नहीं बनाता है बल्कि एक समझौता करता है .. ओवैसी के इस भाषण को एक प्रकार से रहस्योद्घाटन भी माना जा रहा है .. उनके ही भाषण के बाद कांग्रेस भी अपना दावा रखने लगी . उधर, कांग्रेस ने तीन तलाक को निषेध करने वाले विधेयक को स्थायी समिति को भेजने की मांग की और दावा किया कि यह मुस्लिम समुदाय के निशाना बनाने का प्रयास है ।

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