सिर्फ तीन तलाक और हलाला ही नहीं.. जानिये क्या होता है हुल्ला, इद्दत और खुला ?

देश में इस तीन तलाक को लेकर सियासी माहौल गर्माया हुआ है. विपक्ष के कड़े अवरोध के बाद भी केंद्र सरकार ने लोकसभा से तीन तलाक बिल पास करा लिया है. अब ये बिल राज्यसभा में रखा जाएगा, जहाँ से पास कराने के लिए केंद्र सरकार अपनी योजनायें बनाने में जुटी हुई है. खैर तीन तलाक को लगभग सभी लोग जानते ही हैं तथा तीन तलाक के साथ ही हलाला के खिलाफ भी आवाज उठ रही हैं. हलाला के बारे में लगभग सभी लोग जानते ही हैं तथा ये भी जानते हैं कि हलाला की आड़ में किस तरह मुस्लिम महिलाओं का शारीरिक शोषण किया जाता है.

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तीन तलाक और हलाला के अलावा भी इस्लाम के कुछ ऐसे शब्द हैं, जिन्हें जानना जरूरी है तथा ये शब्द हैं हुल्ला, इद्दत और खुला. जैसा कि सभी तीन तलाक के बाद अगर आदमी अपनी बीवी को दोबारा अपनाना चाहे तो उसे तब तक नहीं पा सकता, जब तक उस औरत ने फॉर्मल तरीके से दूसरे मर्द से शादी ( सेक्स) न की हो और उसके बाद उससे तलाक न ले लिया हो. अर्थात औरत को किसी मर्द के साथ निकाह करके शारीरिक संबंध बनाने होते हैं, ये होता है हलाला.

अब जानते हैं इद्दत के बारे में.. तलाक के बाद लड़की अपने मायके वापस आती है तब वह इद्दत के तीन महीने 10 दिन बिना किसी पराए आदमी के सामने आए पूरा करती है. फिर इद्दत का वक्त पूरा होने पर वो लड़की आजाद है. अब उसकी मर्जी है वो चाहे किसी से भी शादी करे.

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क्या है हुल्ला?

अक्सर ये होता है कि तीन तलाक की आसानी के चलते मर्द अक्सर बिना सोचे-समझे तीन बार तलाक-तलाक-तलाक बोल देते हैं और बाद में जब उन्हें गलती का एहसास होता है तो वे अपना संबंध फिर उसी औरत से जोड़ना चाहते हैं. ऐसे में ये परिस्थिति अक्सर देखने को मिल जाती है पर फिर से संबंध जोड़ने से पहले निकाह हलाला जरूरी होता है. हालांकि इन सबका इंतजाम भी है, क्योंकि इसका एक पहलू ये भी है कि अगर मौलवी हलाला मान ले तो समझे हलाला हो गया इसलिए मौलवी को मिलाकर किसी ऐसे इंसान को तय कर लिया जाता है, जो निकाह के साथ ही औरत को तलाक दे देगा. इस प्रक्रिया को ही हुल्ला कहते हैं यानी हलाला होने की पूरी प्रक्रिया ही ‘हुल्ला’ कहलाती है.

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क्या है खुला ?

वो इंसान जो ‘हुल्ला’ यानि औरत के साथ शादी करके बिना संबंध स्थापित किए तलाक दे देने के लिए राजी होता है उसे तहलीली कहा जाता है. ये निकाह के साथ ही औरत को तलाक दे देता है ताकि वो अपने पहले शौहर से शादी कर सके. शरिया के मुताबिक अगर सिर्फ बीवी तलाक चाहे तो उसे शौहर से तलाक मांगना होगा, क्योंकि वो खुद तलाक नहीं दे सकती. अगर शौहर तलाक मांगने के बावजूद भी तलाक नहीं देता तो बीवी शहर काज़ी (जज) के पास जाए और उससे शौहर से तलाक दिलवाने के लिए कहे। इस्लाम ने काज़ी को यह हक दे रखा है कि वो उनका रिश्ता खत्म करने का ऐलान कर दे, जिससे उनका तलाक हो जाएगा और इसे ही ‘ख़ुला’ कहा जाता है.

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