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राफेल उस जगह पर हुआ तैनात जहाँ हुआ था उसका सबसे ज्यादा विरोध

राफेल लड़ाकू विमान.. 2019 लोकसभा चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा था. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी हर चुनावी सभा तथा प्रेस कांफ्रेसं में राफेल डील में घोटाले का आरोप लगाते हुए पीएम मोदी को चोर कहते थे. हालाँकि कांग्रेस का ये दांव उलटा पड़ गया तथा देश की जनता ने विशाल बहुमत के साथ नरेंद्र मोदी को दोबारा से देश की सत्ता सौंप दी.

अब राफेल को लेकर एक चौकाने वाली खबर सामने आई है. अब लड़ाकू राफेल विमान को उस जगह पर तैनात किया गया है जहाँ उसका सबसे ज्यादा विरोध किया गया था. खबर के मुताबिक़, दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय के सामने राफेल लड़ाकू विमान की प्रतिकृति लगाई गई है. दरअसल, दिल्ली में 24 अकबर रोड पर कांग्रेस पार्टी का मुख्यालय है. उसके पास ही मौजूदा वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ का आवास है. उनके आवास के बाहर ही राफेल विमान की प्रतिकृति लगाई गई है जो दिल्ली वालों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इससे पहले, सुखोई एसयू-30 का एक मॉडल उसी स्थान पर स्थापित किया गया था, लेकिन कुछ सप्ताह पूर्व इसे राफेल युद्धक विमान से बदल दिया गया. गौरतलब है कि कांग्रेस राफेल सौदे में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाती रही है और डसॉल्ट एविएशन के एक ऑफसेट साझेदार के रूप में उद्योगपति अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली कंपनी रिलायंस डिफेंस के चयन पर सरकार को निशाना बनाती रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 अप्रैल, 2015 को पेरिस में तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के साथ वार्ता के बाद 36 राफेल विमानों के एक खेप की खरीद की घोषणा की थी. कुल 56,000 करोड़ रुपये के अंतिम सौदे पर 23 सितंबर 2016 को मुहर लगा दी गई. पहला राफेल विमान इस साल सितम्बर में भारतीय वायु सेना को सौंपे जाने की उम्मीद है. राफेल के आने से भारतीय वायुसेना और अधिक शक्तिशाली हो जायेगी. राफेल को लेकर बालाकोट स्ट्राइक के बाद भारतीय वायुसेना प्रमुख धनोआ ने कहा था कि अगर देश में राफेल लड़ाकू विमान होते तो भारत बेहतर परिणाम हासिल कर सकता था

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