जब राष्ट्र सन्न रह गया था इस पार्टी के बयान से, जिसने कहा था- क्यों मनाएं हम कारगिल विजय दिवस, इससे हमें क्या लेना देना.. फिर 5 साल नहीं मनाया गया

आज 26 जुलाई को पूरा देश ने कारगिल विजय दिवस मना रहा है तथा भारतीय सेना के जांबाज रणबांकुरों को याद कर रहा है, उन्हें नमन कर रहा है. देशभर में लोग अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि समर्पित कर रहे हैं, राष्ट्ररक्षकों के बलिदान के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त कर रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस देश में 5 वर्ष तक कारगिल विजय दिवस नहीं मनाया गया था तथा इसके पीछे एक पार्टी के नेता ने तर्क दिया था कि इस युद्ध ने जश्न से हमें क्या लेना देना.

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इस नेता ने कहा था कि अटल जी की NDA सरकार में ये युद्ध लड़ा गया, जीता गया तो NDA ही इसका जश्न मनाये. जिस पार्टी के नेता ने ये बयान दिया था उस पार्टी का नाम जानकर आप हैरान रह जायेंगे. कारगिल विजय दिवस को खारिज करने वाली ये पार्टी है कांग्रेस तथा ये बयान दिया था कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने, जिससे पूरा राष्ट्र सन्न रह गया था. गौरतलब है कि 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान द्वारा अवैध तरीके से कब्ज़ा की गई तमाम चोटियों पर वापस से विजय तिरंगा लहराया दिया था तथा पाकिस्तानी सेना को खदेड़ दिया था. इसमें भारत के कई जांबाजों ने आपने प्राणों को आहुति दी थी.

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भारतीय सेना के अदम्य साहस और शौर्य का परिचय देने वाले इस विजय को प्रत्येक वर्ष हम 26 जुलाई कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाते हैं. कारगिल युद्ध जब हुआ तब देश मे NDA की सरकार थी तथा अटल बिहारी वाजपेयी प्रधान मंत्री थे. 2004 में सत्ता परिवर्तन हुआ, कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA की सरकार बनी तो प्रत्येक वर्ष होने वाला जश्न राजनीति की बलि चढ़ गया. प्रधानमन्त्री श्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार के पहले कार्यकाल में आधिकारिक तौर पर कारगिल विजय दिवस का जश्न मनाना बन्द कर दिया गया. 2004 से 2009 तक केंद्र की कांग्रेस सरकार ने कारगिल विजय दिवस नहीं मनाया.

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कांग्रेस पार्टी यहीं नहीं रुकी बल्कि 2009 में कांग्रेस के सांसद राशिद अल्वी ने कहा हम कोई कारण नहीं देखते इस जश्न को मनाने का. कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने तर्क दिया कि ये युद्ध भारत की धरती पर लड़ा गया. इसलिए इस जीत के कोई मायने नहीं है. राशिद अल्वी ने इससे आगे जाते हुए कहा कि ये NDA सरकार के दौरान का युद्ध था. वो चाहे तो इसका जश्न मनाए, हम नहीं मना सकते. UPA 2 अर्थात मनमोहन सरकार के दुसरे कार्यकाल में भी कारगिल जीत को याद नहीं किया जाता अगर भारतीय जनता पार्टी के राज्य सभा सांसद राजीव चन्द्रशेखर ने प्रयास न किया होता.

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21 जुलाई 2009 को भाजपा के राज्यसभा सांसद राजीव चंद्रशेखर ने राज्य सभा के सेक्रेटरी जनरल को पत्र लिखा की वह सभापति की अनुमति चाहते है कि कारगिल विजय दिवस को एक महत्त्वपूर्ण घटना के तौर पर राज्य सभा में उल्लेख करने की अनुमति दें. राजीव चंद्रशेखर जी ने एक पत्र में संसद के सम्मानीय सदस्य को भी लिखा जिसमें याद दिलाया की कारगिल विजय दिवस सिर्फ देश के लिए एक जीत का दिन नही है बल्कि हज़ारो सैनिकों और उनके परिवारों के बलिदान शौर्य और साहस के लिए याद किया जाता है. उसके बाद उन्होंने रक्षा मंत्रालय और भारत सरकार से अपील की वह 2009 से प्रत्येक वर्ष फिर से कारगिल विजय दिवस पर कार्यक्रम शुरू करे. उन्होंने कांग्रेसी नेताओं को इस जीत को भाजपा से जोड़ के न देखने की भी अपील की.

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राजीव चंद्रशेखर के प्रयास 2010 में फलीभूत हुए जब रक्षा मंत्री ए के अन्थोनी का उनके पास पत्र आया जिसमे बताया गया की उस वर्ष से वापस कारगिल विजय दिवस का भारत सरकार द्वारा आधिकारिक जश्न मनाया जाएगा और अमर जवान ज्योति पर एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. आश्चर्य की बात ये है कि राष्ट्र कांग्रेस की इस सोच से अभी तक अनजान था. कांग्रेस की कारगिल विजय को लेकर सामने आयी सोच से ये स्पष्ट हो जाता है कि जिस कांग्रेस ने कारगिल विजय को ही राष्ट्र की विजय, सेना की विजय मानने से इनकार कर दिया तो वह कांग्रेस का सर्जिकल स्ट्राइक पर शक करना लाजिमी है.

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