धर्मनिरपेक्ष भारत में पहले बाइबिल गाई जायेगी, फिर राष्ट्रगान…ऐसे होगा एक मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण


हाल ही में मेघालय हाईकोर्ट के जज ने कहा था कि भारत को आजादी के बाद से ही हिन्दू राष्ट्र होना चाहिए था. इसके साथ ही माननीय न्यायाधीश ने ये भी कहा था कि भारत को इस्लामीकरण से बचाया जाए. माननीय न्यायाधीश के इस बयान पर हंगामा मच गया. तमाम तथाकथित सेक्यूलर राजनेता तथा बुद्धिजीवी जज साहब को धर्मनिरपेक्षता का पाठ पढ़ाने लगे. लेकिन इसी धर्मनिरपेक्ष भारत में पहली बार ऐसा होगा जब राष्ट्रगान से पहले बाइबिल के पद गाये जायेंगे. हिंदुस्तान के एक राज्य के मुख्यमंत्री का ऐसा शपथ ग्रहण समारोह होगा जिसमें राष्ट्रगान बाद में होगा तथा बाइबिल पहले गाई जायेगी.

हम बात कर रहे हैं मिजोरम में जीत हासिल करने वाली राजनैतिक पार्टी “मिज़ो नेशनल फ्रंट” की, जिसके नेता जोरमथंगा शनिवार को ईसाई रीति रिवाजों के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. बाइबल के पदों के साथ इस मौके पर हैंडल के प्रसिद्ध ‘हेललुजाह कोरस’ जैसे धार्मिक भजन भी गाए जाएंगे. नवनिर्वाचित एमएनएफ विधायक लालरुत्किमा ने कहा कि मिजोरम में इस तरह का समारोह पहली बार होगा. उन्होंने कहा, बाइबल के पद पढ़ने के बाद राष्ट्रगान गाया जाएगा. एमएनएफ के बारे में कहा जाता है वह चर्च के साथ करीबी रिश्ते रखती है.

यहां ये सवाल खड़ा होता है कि जब न्यायपालिका ने भारत को इस्लामीकरण से बचाने की बात कही तो धर्मनिरपेक्षता के ठेकेदारों को परेशानी हो हो गई लेकिन अब जब एक मुख्यमंत्री ईसाई रीतिरिवाज के साथ शपथ लेगा, राष्ट्रगान से पहले बाइबिल गायेगा तब ये लोग चुप हैं? आखिर ये कौन सी धर्मनिरपेक्षता है जहाँ एक जज कोई बयान देता हो तो उस पर आपत्ति जताई जाती है लेकिन जब एक मुख्यमंत्री राष्ट्रगान से पहले बाइबिल पढकर शपथ लेता है तो इस पर मौन साध लिया जाता है?


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