कोई है जो भारत की अदालत जाने वाला है, उन पाकिस्तान परस्तों को भारत की सुरक्षा दिलाने के लिए जिनकी रूह तक में बसा है पाकिस्तान


इधर केंद्र सरकार ने पाकपरस्त अलगाववादियों की सुरक्षा वापस ली तो देश के कथित सेक्यूलर राजेनेताओं तथा बुद्धिजीवियों के पेट में मरोड़ें उठ गईं. हद तो तब हो गई जब जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एलान कर दिया कि अगर अलगाववादियों की सुरक्षा वापस नहीं की जाती है तो वह कोर्ट जायेंगे. आश्चर्य होता है कि उमर अब्दुल्ला उन अलगाववादियों के समर्थन में कोर्ट जाने का एलान कर रहे हैं जिनके रूह तक में पाकिस्तान बसा हुआ है तथा वह कश्मीर को हिंदुस्तान से अलग करने की बात करते हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में वीरवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें लगता है कि खुफिया एजेंसियों के इनपुट पर विचार किए बिना सुरक्षा वापस ली गई है. अगर इस पर दुबारा गौर नहीं किया गया तो अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं. उमर ने कहा कि मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं कि क्या कोई प्रदान की गई सुरक्षा का दुरुपयोग कर रहा था, लेकिन सुरक्षा मुहैया किया जाना सरकार का फैसला था. सरकार ने अपनी सूझबूझ के साथ सुरक्षा वापस लेने का निर्णय लिया है. इस निर्णय के प्रभाव और निहितार्थ को देखने के लिए इंतजार करना होगा.

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि राज्यपाल को इस फैसले पर दुबारा गौर करना होगा. उन्होंने कहा कि जहां तक उन्हें लगता है कि इंटेलिजेंस एजेंसियों द्वारा इस फैसले का समर्थन नहीं किया गया होगा. अगर इस फैसले पर गौर नहीं किया गया तो हम अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और उनसे कहेंगे कि वो दस्तावेज तलब करें जिनके आधार पर यह फैसला लिया गया.


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