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आतंकी समीर टाइगर को कुत्ते की मौत मारने वाले मेजर रोहित शुक्ला के खिलाफ लगातार चल रही थी महबूबा और अब्दुल्ला की बयानबाजी.. उसी की आड़ में हो गया इतना बड़ा नरसंहार


इस समय हर हिन्दुस्तानी का गला रुंधा हुआ है, आंखों में आंसू हैं, जुबान लड़खड़ा रही है, मुट्ठियां भिंच रही हैं, शरीर में खून लावा बनकर दौड़ रहा है तो चेहरा तमतमा रहा है. हर हिन्दुस्तानी आक्रोश से भरा हुआ है क्योंकि हिंदुस्तान ने कश्मीर के पुलवामा में 40 से ज्यादा लालों को खोया है. भारतमाता की पावन माटी अपने ही बेटों के लहू से लाल हुई है. सेना के जवानों के बलिदान के बाद देश के आक्रोश के बीच ये सवाल बार बार जेहन में आ रहा है कि आखिर ये स्थिति क्यों आई कि देश के 40 से ज्यादा सुरक्षा बलों को अपनी जान गंवानी पड़ी? हमला जैश ए मोहम्मद ने किया तो वो जिम्मेदार है ही लेकिन क्या वो लोग जिम्मेदार नहीं है जिनके दिल में आतंकियों के लिए तो प्यार है तथा सेना के प्रति नफरत.

मेजर रोहित शुक्ला… संभवतः हर देशवासी मेजर रोहित शुक्ला के नाम से परिचित होगा. वही मेजर रोहित शुक्ला जिन्होंने इस्लामिक आतंकी समीर टाइगर को कुत्ते की मौत मारा था, वही मेजर रोहित शुक्ला जिनके नाम का स्मरण आते ही जहाँ राष्ट्रवादियों के रौंगटे खड़े हो जाते हैं, दिल से सैल्यूट निकलता है तो वहीं इस्लामिक आतंकी तथा आतंकियों के आकाओं के होश फाख्ता हो जाते हैं. मेजर रोहित शुक्ला.. भारतीय सेना का वो नाम है जो आतंकियों के लिए खौफ का पर्याय बन चुका है तो वहीं हिंदुस्तान के लिए गर्व, शौर्य तथा पराक्रम की अनूठी मिशाल.

कश्मीर के पुलवामा में तैनात मेजर शुक्ला की क्विक एक्शन टीम आतंक के गढ़ में चुन-चुन कर आतंक के पर्याय बन चुके चेहरों का शिकार करती रही और इस वीर सपूत के बहादुरी के किस्से पूरे देश की जुबां पर आ गए. अभी तक 52 ऑपरेशन में भाग ले चुके मेजर शुक्ला की रणनीति और हौसले के समक्ष दक्षिण कश्मीर में आतंकियों के किले ढहते चले गए और उनके आका सिर पीटते रह गए. अब जब सब षड्यंत्र विफल हो गए तो इस सपूत को घेरने के लिए एकतरफ जहाँ कश्मीर आतंकी(अलगाववादी) सक्रिय हो गये हैं तो वहीं जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तथा महबूबा मुफ्ती भी.

जैसे जैसे मेजर शुक्ला कश्मीर में आतंकियों को नेस्तनाबूद करते गये, जो आतंकी उनके सामने आया उसको वह जमीन में ढाई फुट नीचे दफ़न करते गये.. जिस भी इस्लामिक आतंकी ने अल्लाह हू अकबर हिंदुस्तान को रक्तरंजित करना चाहा, मेजर रोहित शुक्ल उसको भारतमाता की जय तथा वन्देमातरम बोलकर लाश में बदलते चले गये. फिर मेजर शुक्ला की ये जांबाजी उमर अब्दुल्ला तथा महबूबा मुफ्ती की आँखों में खटकने लगी तथा जिस तरह से मेजर गोगोई को एक साजिश के तहत फंसाया गया ठीक उसी तरह मेजर शुक्ला को भी फंसाने की साजिशें शुरू कर दी गईं. उमर अब्दुल्ला तथा महबूबा मुफ्ती ने मेजर शुक्ला के खिलाफ बयानबाजी शुरू कर दी.

इधर जैसे ही अब्दुल्ला तथा महबूबा ने मेजर शुक्ला पर निशाना साधा तो उधर इस्लामिक आतंकी तथा उनके आका मुस्कुरा उठे कि अब उनका काम आसान हो जाएगा. मेजर शुक्ला के खिलाफ अब्दुल्ला तथा महबूबा की बयानबाजी की आड़ में इस्लामिक आतंकी दल जैश ए मोहम्मद के कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफिले को निशाना बनाया और आज भारतमाता के 40 से ज्यादा बेटे तिरंगे के कफन में लिपटकर लेटे हुए हैं.

अमर बलिदानियों के तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर तथा उनकी विधवाओं, बूढ़े माँ-बाप, कलाई पर राखी बांधने वाली बहिन, दाहिना हाथ उनका भाई तो उनके बिना बाप के हो चुके उनके मासूम बच्चों की आँखों से निकलते आंसू एक सवाल बार बार पूंछ रहे हैं कि  सुरक्षा बलों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जाता है? जिन सुरक्षा बलों पर देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी है वो सुरक्षा बल आखिर अपनी सुरक्षा क्यों नहीं कर पाते? आखिर कब सुरक्षा बलों के जवान देश  की इस कथित छद्म सेक्यूलर राजनीति का शिकार होकर अपने प्राणों को गंवाते रहेंगे, आखिर कब तक??


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