ऐसे ही नहीं लगा पाकिस्तान प्रेमी फारुख अब्दुल्ला पर PSA … एक बड़ा गुनाह ये भी था उनका

जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद केंद्र सरकार अब कश्मीर के विकास तथा सुधार में किसी तरह की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती है. केंद्र सरकार के निशाने पर अब वो लोग हैं जो किसी न किसी तरह से कश्मीर में अलगाववाद की आग भड़काते हैं तथा पाकिस्तानपरस्ती करते हैं. इसी के तहत सरकार ने जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री तथा पीडीपी प्रमुख फारुख अब्दुल्ला को PSA के तहत नजरबन्द किया है. फारुख पर PSA लगाये जाने के बाद विपक्षी दल तथा कथित बुद्धिजीवी भड़के हुए हैं.

लेकिन फारुक अब्दुल्ला पर PSA क्यों लगाया गया है, इसका बड़ा कारण सामने आया है. खबर के मुताबिक़, देश के खिलाफ लोगों को लामबंद करने और घाटी में सार्वजनिक अव्यवस्था पैदा करने की ‘जबरदस्त क्षमता’ वाले बयान उन सूचीबद्ध आरोपों में शामिल हैं, जिनके तहत पाकिस्तान प्रेमी फारुक अब्दुल्ला को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) में गिरफ्तार किया गया है. साथ ही अब्दुल्ला पर अपने भाषणों में आतंकवादियों व अलगाववादियों के महिमा मंडन का भी आरोप लगाया गया है.

ज्ञात हो कि अब्दुल्ला पांच अगस्त को राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले के बाद से गुपकार रोड स्थित अपने घर में नजरबंद हैं. फारुक के खिलाफ की गई पीएसए की कार्रवाई में वर्ष 2016 से अब तक के सात मौकों का हवाला दिया गया है जिसमें उन्होंने अलगाववादी हुर्रियत कांफ्रेंस और आतंकी समूहों के हित में बात की. वह राज्य के पहले पूर्व मुख्यमंत्री हैं जिन्हें पीएसए के तहत गिरफ्तार किया गया और उनके गुपकार रोड स्थित आवास को जेल घोषित कर दिया गया.

फारुक अब्दुल्ला को पीएसए के प्रावधानों के अनुरूप तीन से छह महीने तक जेल में रखा जा सकता है, जिसे 2 साल तक बढ़ाया भी जा सकता है. अब्दुल्ला पर आरोप है कि फारुक 370 व 35ए का सहारा लेकर लोगों को भड़का सकते थे. वह देश की अखंडता को खतरे में डाल कर उग्रवाद का महिमामंडन कर सकते थे. उनकी विचारधार अलगाववाद का समर्थन करते हुए आम लोगों के जीवन और स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा कर रही थी।

फारुक अब्दूल के खिलाफ लगाये गये पीएसए आदेश में कहा गया है कि उनके पास श्रीनगर और घाटी के अन्य हिस्सों में सार्वजनिक अव्यवस्था पैदा करने की ‘जबरदस्त क्षमता’ है. इसे देश के खिलाफ भड़काने की कार्रवाई से जोड़ कर देखा जाता है. उन पर राज्य प्रशासन द्वारा कानून के विरोध में बयान जारी करने का भी आरोप लगाया गया है, जो सार्वजनिक व्यवस्था को परेशान करने के उद्देश्य से थे. यही कारण है कि फारुक  PSA लगाया गया है.

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