जिद तो देखो . वो उपराष्ट्रपति की पत्नी के खिलाफ भी खड़े हो गए

एक वर्ग विशेष में मौलानाओं का स्थान किस कदर ऊंचा है और उस ऊंचे स्थान का किस कदर उपयोग होता है उसे समझने के लये मात्र यही नजीर उचित और पर्याप्त है . यहाँ निशाने पर कोई दुखियारी और भूली भटकी महिला नहीं बल्कि भारत के सर्वोच्च पदों में से एक उपराष्ट्रपति पद पर बैठे व्यक्ति की धर्मपत्नी हैं . यहाँ इन्हे भी तीन तलाक पर चुप रहने की नसीहत दी जा रही है .

मामले की शुरुआत दो दिन पहले हुई थी जब उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी ने तीन तलाक प्रथा में मुस्लिम महिलाओं की पीड़ा को महसूस करते हुए एक बयान दे डाला था जसिमे उन्होंने इसे कुरआन के अनुसार खारिज करते हुए गैरजरूरी बताया था .

उपराष्ट्रपति की धर्म पत्नी सलमा अंसारी जी के इसी बयान से देवबंद उलेमा बुरी तरह से भड़क गए. उन्होंने सलमा अंसारी को नसीहत देते हुए कहा कि जब उन्हें जानकारी नहीं है तो उन्हें सार्वजानिक बयानों से परहेज करना चाहिए . देवबंद के दारुल उलूम जकरिया के वरिष्ठ उस्ताद एवं फतवा ऑनलाइन के प्रभारी मौलाना अरशद फारुकी ने सलमा अंसारी के बयान की घोर निंदा करते हुए कहा कि किसी भी मुद्दे पर केवल असल जानकार ही सही जानकारी दे सकते है.

उन्होंने कहा की ऐसे मामलों जिन पर जानकारी नहीं हो उसमे हमेशा एक्सपर्ट की राय शुमारी ली जाती है और जो इस्लामिक विद्वान कहे उसी को माना जाता है. अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का भी यही कहना है . वो भी शरीयत के मामले में उसका दखल गलत मानते हैं जिसे इस्लाम की जानकारी न हो ..

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