भीम आर्मी व बसपा के रिश्ते सोच में डाल रहे एक बड़े वर्ग को कि वो किस तरफ जाएँ ?

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री तथा बहिजं समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने दंगाई रावण की भीम आर्मी को लेकर बेहद ही तीखी प्रतिक्रया व्यक्त की है. मायावती के बयान के बाद तथाकथित दलित समाज पेशोपेश में है कि वह आखिर तरफ जाए? वह मायावती की तरफ जाए या रावण की तरफ? बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए यूपी में अलग-अलग संगठनों द्वारा चलाए जा रहे अभियान ‘अगली पीएम बहनजी’ को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह के अभियान चलाने वाले संगठनों से उनका कोई लेना-देना नहीं है.

मायावती ने कहा, ‘मुझे पता चला है कि कुछ संगठन जैसे भीम आर्मी और बहुजन यूथ फॉर मिशन 2019 आदि ‘अगली पीएम बहनजी’ नाम से एक अभियान चला रहे हैं. ये सभी संगठन बसपा के विरोधी दलों के हाथों में खेल रहे हैं. इन बसपा-विरोधी संगठनों को चलाने वाले लोग दलित मोहल्लों में हमारी पार्टी के भोलेभाले लोगों को बता रहे हैं कि वो बहनजी को अगली प्रधानमंत्री बनाएंगे. ये सभी संगठन ना केवल हमारे विरोधी दलों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा कर रहे हैं बल्कि नफरत फैलाकर हमारे भोले-भाले दलित समाज को सवर्ण समाज के खिलाफ खड़ा कर रहे हैं.

बता दें कि एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर ने भी 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा के प्रत्याशियों का समर्थन करने को लेकर बड़ा बयान दिया था. चंद्रशेखर से सवाल पूछा गया था कि बसपा सुप्रीमो मायावती उनका या उनके संगठन का समर्थन नहीं करती हैं ऐसे में 2019 के लोकसभा चुनाव में क्या वो बसपा सुप्रीमो मायावती या उनके प्रत्याशियों का समर्थन करेंगे? इसपर चंद्रशेखर ने कहा, ‘हमारी भीम आर्मी मुख्य तौर पर समाज के कमजोर तबके के लिए संघर्ष कर रही है. हम शिक्षा और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाकर दलित समाज में एक आंदोलन पैदा कर रहे हैं, ऐसे में अगर मुझे लगता है कि किसी सीट पर बहुजन समाज पार्टी का प्रत्याशी कमजोर है तो भीम आर्मी और खुद मैं उसका समर्थन करूंगा.’

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