धर्मनिरपेक्षता का ढ़ोग करने वाली कम्युनिस्ट पार्टी अचानक उतर गई हज सब्सिडी के पक्ष में.. सामने आया साम्प्रदायिक बयान

इन मजहबी लोगों को मुफ्त की हज सब्सिडी की इतनी लत लग चुकी है , कि अब ये सरकार द्वारा किए गए निर्णयों का भी विरोध कर रहे है। और बिफरे बिफरे नजर आ रहे है। आपको बता दे कि धर्मनिरपेक्षता का ढ़ोग करने वाली देश की राजनितिक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने हज सब्सिडी खत्म करने पर केंद्र सरकार के निर्णय की आलोचना की और इसे मनमाना और दुर्भावना से प्रेरित बताया।

आपको बता दे कि माकपा ने अपने बयान कहा कि 2012 में उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में हज सब्सिडी को 10 वर्षा के दौरान अनेक चरणों में पूरी तरह समाप्त करने को कहा था। साथ ही बयान में यह कहा गया कि माकपा धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों का पूरी तरह पालन करता है और किसी भी व्यक्ति या समाज को धार्मिक तीर्थयात्रा के लिए किसी प्रकार के केंद्रीय या राज्य वित्त पोषण देने के पूरी तरह खिलाफ है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हज यात्रियों को 2018 से यात्रा सब्सिडी नहीं देने की कल पूरी तरह घोषणा की थी।

सरकार ने यह निर्णय उच्चतम न्यायालय के 2012 के फैसले के मद्देनजर किया है जिसमें हज सब्सिडी 2022 तक धीरे-धीरे पूरी तरह खत्म करने का निर्देश दिया गया था। सब्सिडी राशि का इस्तेमाल अब अल्पसंख्यकों विशेषकर बच्चों की शिक्षा पर पूरी तरह खर्च किया जाएगा।

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