ममता राज में मॉब लिंचिंग कानून बनते ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के साथ मॉब लिंचिंग.. घेर लिया मारो मारो के नारे के साथ


अभी मात्र कुछ दिन ही बीते हैं जब ममता बनर्जी जी ने मॉब लिंचिंग के खिलाफ कडा कानून बना कर साफ़ साफ एलान कर दिया था कि जो भी इस अपराध का दोषी पाया जाएगा उसको आजीवन कारवास तक की सज़ा हो सकती है .. इस कानून के बाद ये माना जा रहा था कि ममता राज में सबके साथ समान न्याय होगा और जो अभी इस अपराध में संलिप्त पाया जाएगा उसको तृणमूल पार्टी शासित पश्चिम बंगाल में मिलेगी कड़ी से कड़ी सजा .. पर यहाँ हालात उलटे नजर आने लगे हैं .

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ममता राज में कानून बनते ही अचानक ही उन्मादी होते दिखाई दे रहे हैं खुद उनकी पार्टी के ही कार्यकर्ता.. पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्‍यक्ष दिलीप घोष पर लेक टाउन में शुक्रवार सुबह कथित रूप से उस वक्‍त हमला हुआ जब वह रोजाना की तरह मॉर्निंग वॉक और चाय पे चर्चा के लिए जा रहे थे। उसी दौरान भीड़ ने उनको घेर लिया और हमला किया। दिलीप घोष ने घटना के लिए टीएमसी समर्थकों पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके साथ मौजूद दो बीजेपी कार्यकर्ता इस भी हमले में घायल हुए हैं।

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दिलीप घोष पर इस से पहले भी हमले हो चुके हैं और यहाँ तक कि ममता के मंत्री ने तो सभी सीमाए पार कर के उन्हें आमने सामने की जंग के लिए भी ललकारा था.. भारतीय जनता पार्टी के इस से पहले बंगाल में कई कार्यकर्ता मारे भी जा चुके हैं जिनका आरोप सत्ता के संरक्ष्ण पर लगा था.. दिलीप घोष पर हुए इस हमले के बाद अब सवाल उठता है कि क्या मॉब लिंचिंग का कडा कानून उनके ऊपर भी लागू होगा जो इस हमले के जिम्मेदार हैं . ? दिलीप घोष पश्चिम बंगाल में बंगलादेशी घुसपैठियों के बड़े विरोधी भी माने जाते हैं . ऐसे में इस हमले के पीछे उसका भी कोई कनेक्शन निकले ये सम्भव हो सकता है ..

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