मोदी सरकार ने उठाया बड़ा कदम…इससे 11 दिन बाद घुसपैठियों को लगने वाला है झटका..

 

असम में आई बाढ़ के बीच केंद्र और राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से फाइनल एनआरसी के लिए डेडलाइन 31 जुलाई से बढ़ाने का अनुरोध किया है. कोर्ट से नई तारीख के लिए आग्रह किया गया  एनआरसी की डेडलाइन के लिए. केंद्र सरकार अवैध घुसपैठियों को हर हाल में अपने देश वापस भेजने कि योजना बना ली है. केंद्र ने कहा कि हम भारत को विश्व की रिफ्यूजी कैपिटल नहीं बना सकते.

पहले सुप्रीम कोर्ट ने वेरिफिकेशन के काम को 31 जुलाई तक निपटाने के लिए कहा था.  केंद्र सरकार ने कहा कि लोगों की पहचान संबंधी दस्तावेजों का वेरिफिकेशन करना अभी बाकी है. एनआरसी मामले में केंद्र सरकार ने कहा कि कोऑर्डिनेटर ने इस मामले में अच्छा काम किया है, लेकिन हम लाखों लोगों के मामले में काम कर रहे हैं.

सूत्रों के मुताबिक पता चला है कि बांग्लादेश के बॉर्डर के पास लाखों लोग गलत तरीके से एनआरसी के नाम में आ गए हैं. जिन लोगों का नाम शामिल हुआ है, वे अवैध घुसपैठिए हैं.  केंद्र सरकार ने कहा कि 31 जुलाई को सप्लिमेंटरी लिस्ट जारी कर देंगे, लेकिन फाइनल लिस्ट जारी करने में अभी और समय लगेगा.

केंद्र की तरफ से तर्क रखा गया कि एनआरसी लिस्ट में असम के सीमावर्ती जिलों की सूची में लाखों नाम जुड़ा हुआ है जो बांग्लादेशियों का है. इससे एनआरसी में लाखों  नाम शामिल हो गए जो अवैध घुसपैठियों के है. मेहता ने कहा कि कोऑर्डिनेटर ने इस मामले में अच्छा काम किया, लेकिन हम लाखों लोगों के मामले में काम कर रहे है.  कई लोगों की पहचान संबंधी दस्तावेजों का वेरिफिकेशन होना अभी बाकी है.  इसलिए कोर्ट एनआरसी की डेडलाइन की तारीख बढ़ाई जाए.

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में एनआरसी ड्राफ्ट के 20 फीसदी सैम्पल के फिर से सत्यापन की जरुरत है.  इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हजेला की रिपोर्ट बताती है कि सभी क्लेम का निपटारा करते हुए 80 लाख नामों को चेक किया गया है दोबारा. ऐसे में यहां सैंपल के दोबारा सत्यापन की जरूरत नहीं है. हम अगर वेरिफिकेशन प्रक्रिया से संतुष्ट हैं तो दोबारा इसे दोहराने की जरूरत नहीं, उन्होंने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 23 जुलाई को दी है.

 

.

 

Share This Post