संसद में केंद्र से ली ही गई सफाई – नहीं निकाला गया किसी रोहिंग्या को… रोहिंग्या के लिए इतना अथाह प्रेम क्यों

देश की सुरक्षा के लिए ख़तरा बने रोहिंग्या अवैध अप्रवासियों को वापस म्यांमार भेजने की योजना पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में हलफनामा दायर किया गया था. इस हलफानामे में केंद्र ने कहा कि कुछ रोहिंग्या अवैध अप्रवासियों के पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से संपर्क का पता चला है, ऐसे में ये राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से ख़तरा साबित हो सकते है.केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि जम्मू, दिल्ली, हैदराबाद और मेवात जैसे इलाकों में सक्रिय रोहिंग्या अप्रवासियों के आतंकी कनेक्शन होने की भी खुफिया सूचना मिली है, वहीं कुछ रोहिंग्या हवाला के जरिए पैसों की हेराफेरी सहित विभिन्न अवैध व भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल पाए गए.केंद्र का मानना है कि कुछ रोहिंग्या अप्रवासियों के आईएसआई और आईएसआईएस जैसे संगठनों के साथ तार जुड़े हुए हैं, जो भारत के कई संवेदनशील इलाकों में साम्प्रदायिक दंगे कराकर अपना हित साधना चाहते हैं.

भारत की कई देशों के साथ पोरस बार्डर हैं, जिसके चलते घुसपैठियों की समस्या बनी रहती है इसलिए सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं कर सकती है। लेकिन बुधवार को गृह मंत्रालय ने राज्यसभा में बयान दिया है कि पिछले 3 साल में किसी भी रोहिंग्या को देश से बाहर नहीं निकाला गया है. इस बारे में राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने अपने लिखित बयान में राज्यसभा को बताया है कि अब तक की उपलब्ध सूचना के अनुसार पिछले 3 वर्षों के दौरान लगभग 330 पाकिस्तानी और 1770 बांग्लादेशी लोगों को भारत से निर्वाचित किया गया है, पर पिछले 3 सालों में किसी भी रोहिंग्या को भारत से निर्वासित नहीं किया गया है.

यह जानकारी खास तौर पर यह दर्शाती है कि केंद्र सरकार भले ही रोहिंग्या को लेकर कड़े कदम उठाने की बात कर रही हो पर अभी तक किसी रोहिंग्या को भारत से वापस नहीं भेजा गया है. आपको बता दें कि भारत में अवैध तरीके से बिना सरकारी दस्तावेजों के लोग प्रवेश कर जाते हैं जिसके चलते भारत के अंदर राज्यों में जहां पर बांग्लादेशी या फिर रोहिंग्या आ गए हैं उनसे कई समस्याएं उत्पन्न हो गई है इसी के चलते गृह मंत्रालय ने कहा था कि रोहिंग्या को भारत से बाहर भेजा जाएगा. सरकार ने कहा है कि देश में करीब 40 हजार रोहिंग्या अप्रवासी अवैध रूप से रह रहे हैं. ये काफी बड़ी संख्या है और इस वजह से देश में सुरक्षा से जुड़ी कई समस्याएं सामने आ सकती है. याचिकाकर्ताओं ने इन संधियों का हवाला देकर सरकार से उसके फैसले पर पुनर्विचार की मांग की थी.सरकार ने अदालत से कहा है कि देश पहले से ही अवैध धुसपैठ की समस्या का सामना कर रहा है ऐसे में इस प्रकार के संकट को और पनपने से रोका जाएगा.

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