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मोदी सरकार ने उठाया भ्रष्टाचार के खिलाफ अहम् कदम CBIC के 22 अधिकारियों को घर बैठाया..

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार के आरोपी व अन्य आरोपी अफसरों पर कार्रवाई शुरू कर 20 से अधिक सीनियर अधिकारियों को जबरन रिटायर र दिया है.  इससे पहले भी मोदी सरकार ने सरकारी विभागों से भ्रष्‍टाचार और अन्य मामलों के आरोपी अफसरों को बाहर का रास्ता दिखाया था.

CBIC ने 22 वरिष्ठ अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया गया है. इन 22 अधिकारियों को रिटायर किया गया है वो सभी सुपरिटेंडेंट और एओ रैंक के बताए गए हैं। यह फैसला फंडामेंटल रूल 56 (J) के तहत लिया गया है.

ये अधिकारी CBIC के प्रधान आयुक्त, आयुक्त, और उपायुक्त रैंक के थे. इनमें से ज्यादातर के ख‍िलाफ भ्रष्टाचार, घूसखोरी के आरोप हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभालते ही टैक्स विभाग के 12 वरिष्ठ अफसरों को घर बैठाया गया था. अब तक कुल 49 अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया गया है.

सूत्रों के मुताबिक यह पता चला है कि नोएडा में तैनात आयुक्त  के पद का कए आईआरएस अधिकारी भी है. उस पर आयुक्त स्तर की दो महिला आईआरएस अधिकारियों के यौन उत्पीड़न का आरोप है. एक अन्य आईआरएस अधिकारी ने अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर 3.17 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्ति अर्जित कर रखी  थी.

यह संपत्ति कथित तौर पर पद का दुरुपयोग करके और भ्रष्ट एवं गैर – कानूनी तरीकों से अर्जित कर दी गई थी. इस अधिकारी को समय से पहले सेवानिवृत्ति लेने का निर्देश दिया गया है. आयकर विभाग के एक आयुक्त के खिलाफ सीबीआई की भ्रष्टाचार रोधी शाखा ने आय से अधिक का मामला दर्ज किया था और उन्हें अक्टूबर 2009 में सेवा से निलंबित कर दिया गया था.

एक और  अन्य अफसर जो भ्रष्टाचार और जबरन वसूली में लिप्त थे  और कई गलत आदेश पारित किए थे. इन आदेशों को बाद में अपीलीय प्राधिकरण ने पलट दिया था. उसे भी सेवा से बर्खास्त किया गया है. आयुक्त स्तर के एक अन्य अधिकारी पर मुखौटा कंपनी के मामले में एक व्यवसायी को राहत देने के एवज में 50 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगा था. इसके अलावा उसने पद का दुरुपयोग करके चल/अचल संपत्ति इकट्ठा करने का आरोप भी लगा था. इन सभी अफसरों को रिटायर कर दिया गया है.

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