मदरसों पर सुदर्शन के “बिंदास बोल” पर संघ प्रमुख मोहन भागवत जी की सहमति .. बोले- “उन मदरसों में मिलना चाहिए भारतीयता का ज्ञान जिनमे दी जा रही हथियारों की शिक्षा”

जिस आवाज को पूरी बुलंदी के साथ सुदर्शन न्यूज ने अपने बिंदास बोल में उठाया था अब उसी आवाज को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भगवत जी ने भी अपने बयान में स्वीकार किया . मुद्दा था मदरसे में कट्टरता या आतंकवाद की शिक्षा पर चिंतन जिस पर वसीम रिज़वी ने अपनी चिंता जाहिर की थी और मदरसों को आतंकवाद की शिक्षा का केंद्र बताते हुए उसको बंद करने की मांग की थी . इस पर बढ़ गया था बड़ा विवाद और शुरू हो गयी थी तुष्टिकरण की कुनीति .

लेकिन देश की शांति और सुरक्षा से जुड़े इसी मुद्दे पर सुदर्शन न्यूज के प्रधान सम्पादक श्री सुरेश चव्हाणके जी ने तमाम तथ्यों और प्रमाणिक सबूतों के साथ बिंदास बोल का शो किया था जिसमे उन्होंने आंकड़ो के साथ बताया था कि किस प्रकार उत्तर से दक्षिण और सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशो में भी कई मदरसे कट्टरता और मजहबी उन्माद को बढ़ावा दे रहे थे जो आगे चल कर सामाजिक विद्वेष और यहाँ तक कि आतंकवाद की वजह बन रहे थे .

अब उन्ही तमाम दावों पर लगी है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख श्री मोहन भागवत जी की मुहर और उन्होंने भी माना कि जहाँ हिन्दू संस्कृति शांति का पाठ पढ़ाती है तो वहीँ कुछ मदरसे हथियारों की शिक्षा दे रहे हैं . मोहन भागवत जी ने कहा है कि ऐसे मदरसों में देशप्रेम और भारतीयता की शिक्षा देना बहुत जरूरी है . भले ही उनके बयान का अपने अनुसार अर्थ निकाल कर कुछ मजहबी लोग उसका विरोध शुरू कर रहे हों लेकिन आंकड़े कहते हैं कि उनकी बात अमल करने योग्य जरूर है .

अपने बयान में उन्होंने कहा कि ”इस्‍लाम में संगीत वर्जित है लेकिन अफगानिस्‍तान और पाकिस्‍तान में कव्‍वाली गाई जाती है. इस्‍लाम में मूर्ति पूजा का निषेध है लेकिन इन मुल्‍कों के लोग जब इबादतगाह में प्रार्थना करने आते हैं तो ये इसके विपरीत दिखता है.. उन्होंने इसको ही भारतीयता बताया .. मदरसों के बारे में उन्‍होंने कहा, ”मदरसों में भारतीयता का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए जोकि धर्मों के बीच कोई भेदभाव नहीं करता और शांति की बात कहता है.”

 

देखिये वो पूरा शो इस बार फिर –

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