क्या PFI ने चंदा दिया है गुजरात भाजपा को हराने के लिए. राहुल गांधी का सहयोगी है वो चंदा लेने वाला

वामपंथ की विचारधारा जिहादी मानसिकता और विचारधारा से भी अधिक घातक है। वामपंथी कुतर्क और अनर्गल प्रलाप के स्वयंभू ठेकेदार हैं। रक्तरंजित क्रांति के

नाम पर इसने जितना खून बहाया है, मानवता का जितना गला घोंटा है, उतना शायद ही किसी अन्य विचारधारा ने किया हो। जिन-जिन देशों में वामपंथी शासन

है, वहाँ गरीबों-मज़लूमों, सत्यान्वेषियों-विरोधियों आदि की आवाज़ को किस क़दर दबाया-कुचला गया है, उसके स्मरण मात्र से ही सिहरन पैदा होती है।

आपको बता दे कि अब गुजरात में पीएफआई जो कट्टरता फैलाती है, केरल में पनपी अब गुजरात में फंडिंग कर रही है .
आपको बता दे कि गुजरात में दलितों के पक्ष में आवाज उठाने वाले दलि‍त नेता जि‍ग्नेश मेवानी की मुश्कि्‍लें बढ़ सकती हैं। उन्हें केरल के वि‍वादि‍त संगठन

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडि‍या की राजनीति‍क शाखा एसडीपीआई से चुनावी चंदा लेते हुए देखा गया है।
आतंकी गति‍वि‍धि‍यों में संलि‍प्ता को लेकर यह संगठन एनआईए की नजरों में है। मेवानी ने कि‍तने रुपये का चंदा लि‍या इस बात का पता नहीं चल सका है।

मालूम

हो कि गुजरात वि‍धानसभा में कांग्रेस मेवानी का समर्थन कर रही है। पार्टी ने दलि‍त नेता के पक्ष में अपने उम्मींदवार को दूसरी सीट से लड़ाने का फैसला कि‍या है।
मेवानी द्वारा एसडीपीआई से चुनावी चंदा लेने की बात कही गई है। पीएफआई के नेताओं ने जि‍ग्नेनश को चंदा देने की बात स्वीकार की है। हालांकि‍, उन्हों।ने रकम

का खुलासा नहीं कि‍या है। मेवानी की ओर से इस पर कोई प्रति‍क्रि‍या नहीं दी गई है। एसडीपीआई से जुड़ी संस्था की ओर से जि‍ग्ने‍श को दि‍ए गए चुनावी चंदे को

गुजरात वि‍धानसभा चुनावों में संगठन द्वारा उन्हें समर्थन देने से जोड़ कर देखा जा रहा है।

पीएफआई कार्यकर्ताओं पर केरल में वामपंथी और अखि‍ल भारतीय

वि‍द्यार्थी परि‍षद के कार्यकर्ताओं की हत्या करने का आरोप है। इसके अलावा प्रोफेसर टीजे जोसेफ का हाथ काटने के मामले में भी पुलि‍स ने संगठन के कार्यकर्ताओं

के खि‍लाफ केस दर्ज कि‍या है। इस मामले में पीएफआई के 27 कार्यकर्ताओं के खि‍लाफ अदालत में आरोपपत्र दाखि‍ल कि‍या जा चुका है। आतंकी गति‍वि‍धि‍यों में

संलिप्तता को लेकर एनआईए की नजर भी इस संगठन पर है। इस संगठन के तार प्रति‍बंधि‍त संगठन सि‍मी से भी जोड़ा जाता है। संदि‍ग्ध स्थिं‍ति को देखते हुए

पीएफआई को गैरकानूनी गति‍वि‍धि रोकथाम कानून के तहत प्रति‍बंधि‍त करने की मांग भी की जा रही है। इस मामले एनआईए फि‍लहाल जांच पड़ताल कर रही है।

केरल में संस्था के कई कार्यकर्ताओं के खि‍लाफ कई मामले दर्ज कि‍ए गए हैं।

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