मुस्लिम औरत कहां और किसके साथ जाए इसको बता रहे हैं मुफ़्ती…

 भारत की मुस्लिम बहनों के हक़ को यदि आज भारत में कोई कुचलने की कोशिश कर रहा है तो वह उनका मुस्लिम समुदाय है। एक तरफ जहाँ तीन तलाक और अन्य मुद्दों पर मोदी सरकार मुस्लिम बहनों को आजादी देना चाहती है तो वही उनके मुल्ला, मौलवी, इमाम उनके हक़ कुचलने की हर कोशिश कर रहे है। मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से मोदी सरकार ने साल के आखिर में उन मुस्लिम महिलाओं को भी हज यात्रा करने की इजाजत दी है जो आज तक बिना महरम हज पर नहीं जा सकती थी।

लेकिन कुछ कट्टर मजहबी लोग एक बार फिर मुस्लिम महिलाओं के हक़ को दबाना चाहते है। दारुल उलूम के मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने महरम के खिलाफ आवाज उठाई है ,जिससे मुस्लिम बहने आहत है।

हर मुस्लिम की दिली ख्वाहिश होती की वह अल्लाह को प्यारा होने से पहले एक बार हज यात्रा पर जाये और वहां शैतान को पत्थर मार के आये। हज यात्रा में लाखों मुस्लिम चाहे वह स्त्री हो या पुरुष हर साल जाते है।

कहा जाता है कि मक्का, मदीना इस्लामिक अनुयाईओ का सबसे पवित्र तीर्थ स्थल है। और हर साल दुनिया के लाखो मुस्लिम हज यात्रा करते है। हिंदुस्तान में हज यात्रियों को विशेष छूट दी जाती है। और इस घोसणा के बाद से बिना महरम वाली महिलाओं के सेकड़ो आवेदन आने सुरु हो गए है।
पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा मुस्लिम महिलाओं को बिना किसी महरम (जिससे खून का रिश्ता हो) के हज पर जाने का विशेष तोहफा देने की घोषणा करने पर देवबंदी उलेमा ने सख्त आपत्ति जताई है।

दारुल उलूम के मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने कहा कि बिना महरम के औरत का हज जायज ही नहीं है। क्योंकि इस्लाम औरतों को अकेले यात्रा करने की इजाजत नहीं देता है। 2017 की अंतिम ‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने मुस्लिम महिलाओं को तोहफा देने की बात कहते हुए हज यात्रा करने की इजाजत देने की घोषणा की है।

इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम देवबंद के मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने कहा कि हदीस से साबित है कि औरत को अकेले सफर करने की मनाही है।

अलबत्ता शरई मसला यही है कि औरत अकेले हज पर नहीं जा सकती। मुफ्ती अबुल कासिम ने कहा कि अगर सरकार मुस्लिम ख्वातीन को बगैर महरम के हज पर भेजने की इजाजत देती है तो यह सीधे तौर पर धार्मिक मामलो में सरकार का हस्तक्षेप है। उन्होंने मुस्लिम ख्वातीन से अपील की कि अगर सरकार भी इसकी इजाजत दे तो वह खुद इससे परहेज करें क्योंकि गैर शरई रास्ता इख्तिार कर कोई भी धार्मिक कार्य करना गलत है।

 

तंजीम उलेमा हिंद के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना नदीमुल वाजदी ने भी मुस्लिम महिलाओं की तरफदारी की उल्टा मोदी सरकार पर इल्जाम लगाने लगे। कहा कि महिला को अकेले यात्रा करने की इस्लाम इजाजत नहीं देता चाहे वह धार्मिक यात्रा ही क्यों न हो। मौलाना ने बताया कि महिलाओं की सहुलियत के लिए सऊदी सरकार ने पहले ही चार या उससे अधिक महिला के ग्रुप को हज और उमरा पर जाने की इजाजत दे रखी है।

खादिमुल हुज्जा ने बताया कि सऊदी सरकार की पॉलिसी है कि वह किसी अकेली महिला को सुरक्षा की दृष्टि से हज पर आने की इजाजत नहीं देती इसलिए कोई भी महिला अकेले हज पर नहीं जा सकती है।

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