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राहुल गांधी की हार के बाद अमेठी में खूनी खेल.. स्मृति ईरानी के करीबी बीजेपी कार्यकर्ता की गोली मार कर ह्त्या

23 मई को जब लोकसभा चुनाव के परिणाम आये तो देश ही नहीं दुनिया भी चौंक गई. भारत की जनता ने राष्ट्रवाद तथा विकास के नाम पर प्रधानमंत्री मोदी जी में दोबारा विश्वास जताया तथा उनको बंपर बहुमत दिया तो वहीं कांग्रेस सहित संयुक्त विपक्ष को करारी पटखनी दी. खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपने खानदान की पुस्तैनी सीट अमेठी से बीजेपी की स्मृति ईरानी से चुनाव हार गये. वो अमेठी जहाँ गांधी परिवार का सूरज कभी अस्त नहीं होता था, उस अमेठी की जनता ने राहुल गांधी को जमीन पर ला पटका.

अमेठी से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की हार के बाद अब वहां पर खूनी खेल शुरू हो गया है. खबर के मुताबिक़, अमेठी में बरौलिया गांव के पूर्व प्रधान सुरेंद्र सिंह को देर रात अज्ञात बदमाशों ने गोली मारकर ह्त्या कर दी है. सुरेन्द्र सिंह अमेठी से बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतने वाली स्मृति ईरानी के करीबी थे तथा चुनाव में उनके लिए  जबरदस्त तरीके से चुनाव प्रचार किया था. सुरेन्द्र सिंह की  ह्त्या के बाद घटनास्थल पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात करने के साथ ही हमलावरों की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी है.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक बदमाशों ने उस वक्त इस घटना को अंजाम दिया जब पूर्व प्रधान सुरेंद्र सिंह अपने घर के बाहर सो रहे थे. इसी दौरान बदमाश आये तथा सुरेन्द्र सिंह पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी तथा फरार हो गये. घटना के फौरन बाद परिजन सुरेंद्र को लेकर लखनऊ ट्रामा सेंटर ले गए, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया. घटना की खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और मामला दर्ज कर इसकी पड़ताल शुरू कर दी है. इस हत्या के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है. घटनास्थल पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.

बता दें कि मृतक सुरेंद्र सिंह अमेठी से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को शिकस्त देने वाली बीजेपी नेता स्मृति इरानी के खास थे. वह अपने गांव के प्रधान रह चुके थे और क्षेत्र में उनका प्रभाव भी था. वह बीजेपी और स्मृति के प्रचार में सक्रियता से लगे हुए थे. घटना से एक दिन पहले ही एक समाचार एजेंसी से बातचीत में उन्होंने इलाके में राहुल गांधी की असक्रियता पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि कोई भी ऐसे व्यक्ति को वोट क्यों करेगा जो अपने क्षेत्र में ही नहीं आता है. राहुल बरौलिया गांव में ही 3 साल पहले आए थे और चुनाव में भी वह यहां नहीं आए.

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