अम्मी ने जब उसे बाप की उम्र वाले के हाथ बेचना चाहा तब उसने ले ली शरण प्रभु श्रीराम की.. हिन्दू बनी वो बालिका


क्या शरीयत इस्लामिक महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं देता? क्या शरीयत महिलाओं से जानवरो जैसा व्यवहार करने को कहता हैं? क्या शरीयत महिलाओं को बांध कर रखने को कहता हैं? क्या इस्लाम महिलाओं को दिक्कतें पहुंचाता हैं? आपको बता दें कि भारतीय कानून ने तीन तलाक़ पर रोक लगा रखा हैं। जिसके बाद कई उलेमा भारतीय कानून के खिलाफ खड़े हो गए और उन्होंने शरीयत को ही मानने की धमकी दी और तो और सोच में ही जंजीर बांध रखा हैं, मुस्लिम महिलाये जो शरीयत क़ानून की वज़ह से सताई जाती हैं वो भी उन महिलाओ के खिलाफ खड़ी हो गई।

आपको बता दें तीन तलाक़ की लड़ाई लड़ने वाली इशरत जहाँ को उनके ही परिवार की महिलाये, उनके आस-पड़ोस की महिलायें तक उनको इस्लाम का दुश्मन बता कर बात करना तक बंद कर दिया। जिसके बाद उन्होंने सुरक्षा की मांग की थी। एक और मामले में तीन तलाक़ के लिए लड़ाई लड़ने वाली को किडनैप करने की कोशिश की गई और जान से मारने की भी धमकी मिली। मुस्लिम महिलाओं की हालत का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हो की उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन तलाक पीड़िता की एक नाबालिग बेटी ने गुरुवार को हिंदू धर्म अपनाने का ऐलान कर दिया।
उस 16 वर्षीया लड़की ने बताया की उसकी मां और समाज के अन्य लोग उसकी शादी जबरदस्ती एक 50 साल के अधेड़ से करवाना चाहते हैं। आप सोच सकते हैं की इनकी सोच किस जाहिलियत का शिकार हैं। किशोरी का कहना है कि उसने अपनी मां को तलाक के बाद घुट-घुटकर जिते देखा है। उसने बताया कि 12 साल पहले उसके पिता ने उसकी मां को तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया। उसके बाद से उसकी मां ने घरों में कामकर उसे पाला। लेकिन अब उसकी मां और समाज के अन्य लोग उसकी जबरदस्ती शादी एक अधेड़ से करवाना चाहते हैं।
आप सोच सकते हैं की जो महिला तीन तलाक़ द्वारा सताई गई वो ही ऐसा करने को उतारू हैं। इससे साफ़ समझ आता हैं उनकी सोच में घुस गया हैं गुलामी। किशोरी का कहना है कि उस पर 13 साल की उम्र से ही निकाह के लिए दबाव बनाया जा रहा है। परिवार वालों ने अधेड़ से कुछ पैसे भी लिए हैं। किशोरी का कहना है कि वह शादी नहीं करना चाहती। अभी वह पढ़ना चाहती है। इसलिए वह घर से भागकर जय शिवसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित आर्यन के शरण में आई है। किशोरी के मुताबिक वह तलाक और हलाला जैसी कुप्रथा के दर्द से नहीं गुजरना चाहती। इसलिए हिंदू धर्म अपनाने जा रही है। अब वह हिंदू धर्म अपनाकर अपनी पढ़ाई पूरी करेगी। 

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