मौत से भी दर्दनाक है महिलाओं का खतना जिसे बंद करने की गुहार लगी है मोदी से

एक मुस्लिम महिला ने खतना के खिलाप आवाज उठाई और खतना को बैन करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री मोदी से अपील की। मुस्लिम समाज की तलाक ,खतना ,हलाला कुप्रथा है. जिससे पुरी मुस्लिम महिला अहात है और ये महिलाए इन कुप्रथा के विरोध आवाज उठा रही है। जब से तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओ को राहत मिली। वही दूसरी ओर खतना से आहत मुस्लिम महिलाओ ने खतना से अभिशाप को समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी सरकार से गुहार लगाई। खतना में मुस्लिम महिला को बचपन में बड़े दर्द से गुजरना पड़ता है और इसको बैन करने के लिए सरकार से मांग की।

हाली में शायरा बानो मुस्लिम महिला ने तीन तलाक जैसी कुप्रथा के खिलाप बिंगुल फुक कर उसे खत्म कराया। ये देश की मुस्लिम महिलाओ के लिए वरदान
साबित हुआ।

ठीक इसी तरह अब मासूमा रानाल्वी ने भी दूसरी शायरा बानो बनकर मुस्लिम महिलाओं से जुड़ी खतना कुप्रथा के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत की है. उन्होंने मुस्लिम बच्चियों के बचपन में होने वाले खतना को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखा है. खत में उन्होंने बताया कि किस प्रकार मुस्लिम महिलाओं को बचपन में खतना (फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन) के दर्द से जूझना पड़ता है।

मासूमा रानाल्वी ने ख़तना को बैन करने के लिए पीएम मोदी को खत लिखा जिसमे साफ कहा गया की “आपने स्वतंत्रता दिवस पर मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने की बात कही थी. ट्रिपल तलाक को आपने महिला विरोधी कहा था, सुनकर बहुत अच्छा लगा.

हमें यह जानकार खुशी है कि अब तो तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं को छुटकारा भी मिल गया है”अब आप से हमारी कौम की महिलाएं एक और विनती करती हैं कि खतना (फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन) को भी खत्म कर दीजिए। आगे मासूमा रानाल्वी ने बताया की मुस्लिम समाज में लड़कियो को 7 साल की उम्र में दाई या लोकल डॉक्टर के पास ले जाकर बच्ची के शरीर के क्लीटोरिस भाग को काट देते हैं. जिसका दर्द बच्ची जिंदगी भर तक नहीं भूल पाती।

मासूमा ने बताया कि बोहरा समुदाय में सालों से ‘खतना प्रथा’ या ‘खफ्ज प्रथा’ का पालन किया जा रहा है. बोहरा, शिया मुस्लिमों की जाति हैं, जिनकी देश में संख्या लगभग 20 लाख है. ये महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में ज्यादातर बसे हुए हैं.

बोहरा समुदाय के अलावा अन्य मुस्लिम समाज में खतना का प्रचलन समाप्त हो चुका है। गौरतलब है कि इस विशेष समुदाय में इस प्रथा को खत्म करने के लिए साल 2015 में बोहरा समुदाय की कुछ महिलाओं ने एकजुट होकर ‘WeSpeakOut On FGM’ नाम से एक कैंपेन भी शुरू किया था. लेकिन वह कोशिश सफल नहीं हो सकी थी।

असल में खतना क्या होती ? दर्द की आड़ में बेदर्दी मजहबी लोग खतना जैसी कुप्रथा को अंजाम देते है.सच में ये दर्द इन मजहबी ठेकेदारो को नहीं मिलता ये सिर्फ मासूम लड़कियो को खतना का दर्द सहना पड़ता है।

मजहबी ठेकेदार जबरदस्ती खतना कुप्रथा को मासूम लड़कियो पर थोपते है। मुस्लिम बोहरा समुदाय में 7 साल की उम्र में बच्चियों के भगशिश्निका (clitoris) को सुन्नत किया जाता है, इसमें बच्ची के हाथ-पैर मजबूती से पकड़े जाते हैं और इसके बाद बच्ची के शरीर के क्लीटोरिस भाग पर मुल्तानी मिट्टी लगाकर वह हिस्सा काट दिया जाता है.खतना के बाद बच्चियां दर्द से कई महीनों तक जूझती रहती हैं, और कई की तो संक्रमण फैलने के कारण मौत भी हो जाती है।


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