ये भीड़ किसी महापुरुष के अंतिम यात्रा की नहीं बल्कि आज सेना के हाथों मारे गए एक इस्लामिक आतंकी के जनाज़े की है .. ध्वस्त हुई धर्मनिरपेक्षता


 

 


 

वो चीख चीख कर कहते हैं कि उनकी राष्ट्रभक्ति पर शक न किया जाए. लेकिन वो हमेशा ऐसे कार्यों को अंजाम देते हैं जिससे शक ही नहीं बल्कि पूरा प्रमाणित हो जाता है कि वो कुछ भी हो सकते हैं लेकिन हिंदुस्तान के प्रति वफादार नहीं हो सकते. वो कभी सेना पर पत्थरवाजी करते हैं तो कभी आतंकियों के समर्थन में नारेबाजी करते हैं उसके बाद भी उन्हें ये उम्मीद रहती है कि देश की जनता उन्हें सबसे प्रबल, प्रखर राष्ट्रवादी बोले.

खैर इस सबके बीच हमारे देश की सेना के जवानों ने आज सुबह पूरे देश को एक खुशखबरी दी. आज जैसे ही देश सोकर उठा वैसे ही सबसे पहले खबर मिली कि मेरे देश की सेना के जांबाज जवानों ने देश के दुश्मन 3 आतंकवादियों को दफन कर दिया है उनको मार गिराया है एक बड़ी घुसपैठ की कोशिश नाकाम की है. एक तरफ जहां पूरा देश इस पराक्रम के लिए भारतीय सेना को सेल्यूट कर रहा था वहीं कश्मीर से सेना के विरोध में आवाजें उठ रहीं थी.

जो तीन आतंकी मारे गए उनमें से एक कश्मीर का स्थानीय निवासी था जिसका नाम ईशा फाजिली था. ईशा फाजिली जब तक अपने नापाक इरादों से देश को दहलाता तब तक भारतीय सेना ने उसका काम तमाम कर दिया था. बस इसी कारण कश्मीर के लोगों का आतंकी ईशा फाजिली के ये बड़ा हुजूम उमड़ पड़ा.

दोपहर बाद जब ईशा फाजिली का जनाजा निकाला गया तो उसमें लाखों की भीड़ उमड़ लड़ी जिसमें बच्चे से लेकर बूढ़े तक और महिलाएं भी शामिल थी. जब पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम साहब का देहावसान हुआ था तब उनकी अंतिम यात्रा में दाढ़ी टोपी वाले नजर नहीं आये थे लेकिन ईशा फाजिली के लिए लाखों लोग घर से बाहर सड़कों पर थे. इससे पहले बुरहान बानी के जनाजे में भी इसी तरह की भीड़ उमड़ी थी.

अब सवाल उठता है कि जो लोग अब्दुल कलाम को तो नहीं अपना सके लेकिन पहले बुरहान बानी और अब ईशा फाजिली के लिए उन्होंने घाटी को बंद कर दिया. आज एक बार फिर कश्मीर के मुस्लिमों ने देश के दुश्मन के समर्थन में नारेबाजी की इस सबके बाद भी इनको देशद्रोही न बोलें तो क्या बोलें? जो ईशा फाजिली देश को लहूलुहान करना चाहता था जो देश की सेना को मारना चाहता था उसके लिए अपने घरों से निकलने वालों को देशद्रोही न कह जाए तो क्या कह जाए?? जब सेना का कोई जवान अपना बलिदान देता है तो उस महावीर कोई सेल्यूट नहीं करता लेकिन एक आतंकी के लिए इस तरह उमड़ पड़ते हैं फिर भी कहते हैं कि राष्ट्र इन ओर शक न करे. वैसे भी इस सबके बाद शक की कोई गुंजाइश ही नहीं क्योंकि ये सीधे सीधे देशद्रोह है.

लेकिन हमें अपने देश की सेना पर गर्व है कि ये सब होने के बाद भी वो हमारी रक्षा के लिए हमारे देश की रक्षा के लिए इन देशद्रोही लोगो का मुकाबला करते हैं अपने प्राणों का बलिदान देते हैं. भले ही आज पूरा कश्मीर ईशा फाजिली के लिए सड़कों पर था लेकिन हमारे देश की आगे भी हर इस बुरहान बानी को हर उस ईशा फाजिली को इसी तरह कुचलती रहेगी जो देश के खिलाफ कोई भी कदम उठाएगा.

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