सिर्फ मोदी ही नही, भारत का लगभग हर हिंदूवादी है आक्रांताओं के निशाने पर. तमिलनाडु में हिंदूवादी नेता अर्जुन व मूकंबिकई की हत्या से पहले गिरफ्तार हुए 5 साजिशकर्ता

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की हत्या के साजिशकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद उनके लिए विपक्षी दलों का उठता समर्थन कहीं न कहीं हवा दे गया है उन तमाम आस्तीन के सांपो को जो पहले से ही निशाने पर उन लोगों को के कर बैठे थे जो देश की संस्कृति व देवी देवताओं के सम्मान की खातिर संघर्ष कर रहे हैं ..इसी क्रम में एक बार फिर से पकड़े गए हैं 5 ऐसे साजिशकर्ता जो निशाने पर ले चुके थे दक्षिण भारत मे हिंदुत्व की लड़ाई मिशनरी व इस्लामिक आतंक से लड़ रहे हिंदूवादी नेताओं को .. इस खुलासे के बाद देश भर के हिंदूवादी नेताओं की सुरक्षा को ले कर सवाल खड़े हो गए हैं ..

तमिलनाडु के कोयंबटूर में हिन्दूवादी संगठनों के नेताओं की हत्या की साजिश रचने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि खुफिया जानकारी के आधार पर विशेष जांच दस्ते ने चेन्नई से यहां पहुंचे चार लोगों को हिरासत में लिया। वहीं उन्हें रिसीव करने पहुंचे एक अन्य शख्स को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।

पुलिस ने बताया कि वे सभी लोग एक शादी में शरीक होने यहां आए थे। हालांकि पूछताछ में पता चला कि उनका मकसद हिन्दू मक्कल कच्ची के नेता अर्जुन संपथ और हिन्दू मुनानी के नेता मूकंबिकई मणि सहित कुछ हिन्दू नेताओं को मारना था। पुलिस ने बताया कि इन लोगों के पास से पांच हंसिये मिले हैं।

इन सभी लोगों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम और हत्या की साजिश रचने से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। इन सभी आरोपियों को यहां सेंट्रल जेल में रखा गया है, वहीं उन हिन्दू नेताओं को सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इन लोगों के खिलाफ आतंकवाद से जुड़ी धाराएं तो नहीं लगाई है, लेकिन पुलिस का कहना है कि इन लोगों के जम्मू-कश्मीर में सक्रीय आईएसआईएस के धड़े से संपर्क थे।

पुलिस का कहना है कि ये लोग 13 सितंबर को हिंदुओं के पवित्र दिन अर्थात पावन गणेश चतुर्थी के दौरान सांप्रदायिक सद्भाव भड़काना और अस्थिरता पैदा करना चाहते थे।  फिलहाल इन गिरफ्तारियों ओर तथाकथित सेकुलर समूह व स्वघोषित बुद्धिजीवी वर्ग खामोश है.. पुलिस आगे की जांच गहनता से कर रही है लेकिन ये घटना सवाल छोड़ कर गयी है कि इस देश मे हिन्दू और हिंदुत्व की आवाज उठाने वालों के खिलाफ हत्या की साजिशें क्यों रच दी जाती हैं और उनके लिए बुद्धिजीवी वर्ग में आवाज क्यो नही उठती है ? 

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