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सेना के हाथों ढेर हुए आतंकी को योद्धा बता श्रद्धांजलि दे रहा ये गद्दार जबकि खुद पर चल रही NIA

 


वो हिन्दुस्तान में रहता है हिन्दुस्तान का खाता है. लेकिन जब भी उसका मुंह खुलता है, जब भी वो बोलता है तो देश के खिलाफ बोलता है देश के दुश्मनों की पैरोकारी करता है. जिसके मुख से कभी भारतीय सेना की तारीफ़ में दो शब्द नहीं निकले हैं लेकिन वो हमेशा से आतंकियों को सेल्यूट करता है. अब एक बार फिर उसने अपनी गंदी जुबान खोली है तथा देश को दहलाने का प्रयास करते समय भारतीय सेना के हाथों दफन हुए आतंकी ईसा फाजली को उसने एक योद्धा बताते हुए उसको श्रद्धांजली दी है.

हम बात कर रहे हैं कश्मीरी अलगाववादी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी की, हुर्रियत कांफ्रेस (ग) के नेता सैयद अली गिलानी ने बुधवार को सेना के हाथों मारे गये आतंकी ईसा फाजली को कश्मीर की आजादी की लड़ाई का एक वीर योद्धा बताया. ज्ञात हो कि फाजली अपने दो साथियों के साथ सोमवार को अनंतनाग में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था. गिलानी ने कहा कि कश्मीर की आजादी की इस जंग में उसकी प्रतिबद्धता अनुकरणीय थी. गिलानी ने कहा कि ईसा मेरे बेहद करीबियों में से एक था. तथा बुरहान बानी को अपना आदर्श मानता था.  गिलानी यहीं नहीं रुका, कुरान की हवाला देते हुए गिलानी ने कहा कि ये शहीद अभी भी जिंदा है. गिलानी ने कहा कि ईसा फाजली अल्लाह के मार्ग पर गया है तथा अल्लाह के मार्ग पर जाने वाले लोग मरते नहीं हैं.

अब सवाल उठता है कि जिस आतंकी को सेना ने मारा, देश को दुश्मन को सेना ने मारा लेकिन ये गिलानी उस आतंकी को शहीद बता रहा है तथा खुलकर कबूल रहा है कि वो उसका करीबी था तब ये गिलानी को भी आतंकी क्यों न माना जाये? जब गिलानी एक आतंकी को पनाह देता है, देश के शत्रु को प्रेरणाश्रोत बताता है तब गिलानी पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं हो सकती? समझ नहीं आता कि कैसा कानून है जो देश के दुश्मन की तरफदारी करने वाले वाले को सजा के बजाय अन्य सरकारी सुविधाएं प्रदानकरता है.

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