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नेपाल से आतंकी को पकड कर दिल्ली पुलिस ने दिया अपनी बेगुनाही का सबूत. अब सेकुलर ब्रिगेड ने गुजरात पुलिस के शौर्य पर उठाई ऊँगली

आखिर कब तक सत्ता इस प्रकार के आरोपों से पुलिस और सेना के मनोबल पर वार होने देगी .. कब तक आतंक के प्रेमियों के निशाने पर हमारे सेना और हमारे सुरक्षा बल रहेगे . अभी दिल्ली पुलिस के बटला के कातिल को इतने सालों बाद नेपाल से पकड कर लाइ है और जहाँ एक तरफ पुलिस के बलिदानी की इतने दिन बाद जनता को याद आई तो उधर आपराधिक तत्वों ने इसका उपाय खोज ही निकाला है और उन्होंने अब दिल्ली पुलिस के बलिदान के बाद निशाने पर लिया है गुजरात ATS को क्योकि उनसे पुलिस की वीरगाथा किसी भी रूप में रास नहीं आ रही है . 

ज्ञात हो कि मुठभेड़ में मार गिराए गये आतंकी सोहराबुद्दीन शेख के भाई रुबाबुद्दीन शेख के एक धर्मनिरपेक्ष वकील ने बुधवार को बंबई उच्च न्यायालय में इस मुठभेड़ को गुजरात एवं राजस्थान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से रची गयी साजिश का नतीजा बता दिया है . रुबाबुद्दीन की तरफ से किये गये वकील गौतम तिवारी ने सीधे सीधे पुलिस को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि सभी मुख्य आरोपियों – गुजरात एटीएस के वरिष्ठ अधिकारी डी जी वंजारा एवं राजकुमार पांडियन और राजस्थान के आईपीएस अधिकारी दिनेश एम एन – को इस मामले में आरोप-मुक्त कर दिया गया जबकि वकील साहब की जांच के अनुसार इन्ही अधिकारियो ने इन सभी मुठभेड़ों की साजिश को अंजाम दिया था. यद्दपि वकील साहब इनके पीछे कोई ठोस आधार नहीं दे पाए .

असल में दिल्ली पुलिस ने इतने सालो बाद जब बटला के एनकाउंटर को सही ठहरा दिया उसके बाद से ही कोई न कोई रास्ता खोजा जा रहा था पुलिस को दोषी ठहरा कर आतंकियों को सही सबित करने और कानून आंतक पर हावी न हो इसके प्रयास करने के . इसी के चलते राजनैतिक साजिश में फंसाए गये पुलिस अधिकारियो को आरोप-मुक्त करने के खिलाफ दलील देते हुए वकील तिवारी साहब ने दावा किया कि नवंबर 2005 में उदयपुर के पुलिस अधीक्षक रह चुके यह पुलिस अधिकारी सोहराबुद्दीन एवं उसकी पत्नी को गिरफ्तार करने और फिर मारने की ”साजिश का हिस्सा’ रहे अन्य पुलिस अधिकारियों से मिलने के लिए अहमदाबाद गए थे. तिवारी ने कहा कि दिनेश एम एन का दावा है कि वह आधिकारिक प्रशिक्षण के लिए अहमदाबाद गए थे जबकि राजस्थान पुलिस के महानिरीक्षक सहित उनके अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को उस वक्त किसी ऐसे प्रशिक्षण के बारे में पता ही नहीं है.

तत्कालीन समय में कांग्रेस सरकार में जहाँ फ़ौज के मेजर उपाध्याय और कर्नल पुरोहित जैसे वीरों के खिलाफ NIA लगाईं गयी थी वहीँ उनके ही इशारे पर सीबीआइ ने इस मामले में वंजारा, पांडियन, दिनेश और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सहित 38 लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया था. लेकिन वंजारा, पांडियन, दिनेश और अमित शाह सहित 15 लोगों को आरोप-मुक्त किया जा चुका है. इन सभी मामलो में केवल वोटबैंक बटोरने के चक्कर में तत्कालीन सरकार ने समाज और राष्ट्र की रक्षा करते जवानो के ध्वस्त होते मनोबल की भी चिंता नहीं की और अपने कुत्सित कार्यो को अंजाम दिया . 

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