देवभूमि हिमांचल में बस रहे हैं रोहिंग्या .. शिमला में भारी संख्या में होने की सूचना

कभी लन्दन, पेरिस , बर्लिन जैसी जगह दुनिया की सबसे खूबसूरत जगहों में गिनी जाती थी और उस जगह पर धीरे धीरे सीरिया और इराक के शरणार्थी दया भाव दिखा कर बसाये गए ..इस दया का प्रतिफल ये रहा कि मात्र साल भर के ही अंदर ये सभी जगह आतंकी घटनाओं , छुरेबाज़ी और कत्लगाह की पहचान बन कर रह गयी .. फ्रांस और ब्रिटेन में जितनी भी आतंकी घटनाये हुई अमूमन सबमे अल्लाह अकबर का नारा लगा कर इराक व सीरिया के वो शरणार्थी शामिल पाए गए जिन्हें दया दिखा कर उन देशों ने रखा था ..अभी हाल ही में जर्मनी ने एक बलात्कारी शरणार्थी का इराक से प्रत्यर्पण करवा लिया अपने नियम कानून के हिसाब से सज़ा देने के लिए ..

अब कमोबेश भारत के भी कई दर्शनीय स्थलों व नामी शहरों के वही हाल होते जा रहे हैं .. हैदराबाद आदि स्थलों स्व पासपोर्ट व आधार कार्ड के साथ पकड़े गए रोहिंग्या के बाद अब इनकी आहट मिली है देवभूमि कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश के सबसे दर्शनीय स्थल शिमला में जहां भारतीय जनता पार्टी का शासन है और शिमला ही उसकी राजधानी है .:मीडिया रिपोर्ट से आ रही जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में रोहिंग्याओं को रखा जा रहा काम पर जिस से पूरी तरह से बेखबर है पुलिस प्रशासन अर्थात इसकी जानकारी प्रशासन तक को नही दी गयी और उन्हें शिमला भेज दिया गया ..

विदित हो कि भले ही बौद्धों से जंग में हार कर भागे रोहिंगयाओ को भारत की सरकार शरणार्थी न मानते हुए देश से बाहर भेजना चाहती है लेकिन उन्होंने पैर ऐसे पसारने शुरू कर दिए जो आने वाले समय में भारत के लिए बहुत मुश्किल पैदा करने वाले हैं .. । हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में इन्हें काम पर रखा जा रहा है। रोहिंग्या शिमला में पहुंच गए, मगर पुलिस प्रशासन बेखबर है। मामला उजागर करने पर जांच की बात हो रही है, मगर सवाल यह है कि जिन रोहिंग्या को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जा रहा है, वे शिमला तक कैसे पहुंच गए।

नगर निगम शिमला ने पांच वार्डो में सफाई व्यवस्था को आउटसोर्स किया है। इसके तहत एनके कंस्ट्रक्शन कंपनी को ठेका दिया गया है। यह कंपनी जम्मू से रोहिंग्याओं को कूड़ा एकत्रीकरण के लिए शिमला लेकर आई । ये लोग शिमला में घर-घर जाकर कूड़ा उठाएंगे। इससे पहले कि शिमला में सफाई कार्य शुरू हो, शहर में पहुंचे 12 रोहिंग्याओं ने रहने के लिए अस्थायी ठिकाना तलाश लिया है। अब ये लोग परिवार को लेने जम्मू गए हैं। शिमला में काफी संख्या में बांग्लादेशी भी रह रहे हैं। ये लोग निर्माणाधीन भवनों में लकड़ी का काम करते हैं।  लोगों ने रोहिंग्या से बात करने का प्रयास किया तो उसे हिंदी समझ नहीं आ रही थी। तब जा कर पता चला कि ये रोहिंग्या हैं .. इस प्रकार की चूक आने वाले समय मे देश के लिए उन करोड़ो बंगलादेशियो के लिए भारी पड़ने वाली है .. सवाल ये भी है कि क्या मोदी के सफाई अभियान के ब्रांड रोहिंग्या ही होने वाले हैं जो इन्हें शिमला की सफाई का जिम्मा दे दिया गया ?

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