“पापा की वर्दी में भी पहिनूंगा और चुन-चुन कर मारूंगा उन गद्दारों को जिन्हें मेरे पापा नहीं मार पाए”– ये शब्द हैं एक बलिदानी के बेटे के

जम्मू कश्मीर के अखनूर सेक्टर में कायर, नापाक मुल्क पाकिस्तान की गोलीबारी में भारतमाता के लाड़ले BSF के जवान उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी सत्यनारायण यादव व् फतेहपुर निवासी विजय कुमार पाण्डेय शहीद हो गये. कुछ दिनों पहले इन्हीं BSF के जवानों से रहम की भीख मांगने वाले नापाक पाकिस्तान ने एक बार फिर से हिन्दुस्तान की पीठ में छुरा खोंपा तथा संघर्ष विराम पर सहमती जताने के बाद धोखे से हमला कर दिया, जिसमें भारतीय सेना के दो जांबाज जवान शहीद हो गये.

अमर बलिदानी हुतात्मा सतनारायण यादव का पार्थिव शरीर सोमवार की सुबह देवरिया पहुंचा. उन्हें पुलिस लाइन में बीएसएफ के जवानों और पुलिसकर्मियों ने गार्ड ऑफ आंनर की सलामी दी. इसके बाद पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा जहाँ उनका अंतिम संस्कार किया गया. शहीद सत्यनारायण यादव के अंतिम संस्कार में क्षेत्रवासियों का हुजूम उमड़ पड़ा तथा भारतमाता की जय, हिंदुस्तान जिंदाबाद व शहीद सत्यनारायण अमर रहें के नारों से असमान गूँज उठा. हजारों की संख्या में उमड़े क्षेत्रवासियों ने शहीद सत्यनारायण को नम आँखों से अंतिम विदाई दी. इसी दौरान शहीद सत्य नारायण यादव के बेटे ने कहा कि अगर उसे सेना में भर्ती होने का मौका मिला तो वह कायर पड़ोसी देश से अपने वीर पिता की शहादत का बदला जरूर लेगा.

बलिदानी राजेश यादव के बेटे राजेश यादव ने कहा कि देश में आतंकवाद के पोषक पाकिस्तान ने दशकों से छद्म युद्ध छेड़ रखा है. दिन के उजाले में चमगादड़ की माफिक पड़ोसी देश के सैनिक सुप्त अवस्था में रहते है जबकि रात के अंधेरे में वार करना पाकिस्तान का शगल बन चुका है. शहीद के बेटे ने कहा कि मेरे पिता और फतेहपुर निवासी शहीद विजय कुमार पाण्डेय की शहादत बेकार नही जानी चाहिए. सेना से मेरा आग्रह है कि वह पाकिस्तान को माकूल जवाब दे. 
शहीद सत्यनारायण के अंतिम संस्कार के दौरान जहाँ हजारों की संख्या में उपस्थित भीड़ जहाँ रोते हुए अपने जांबाज को अंतिम विदाई दे रही थी, उसी समय उनका बेटा राजेश यादव अटल खड़ा था तथा संकल्प ले रहा था कि आगे चलकर वह भी सेना में भर्ती होगा था नापाक पाकिस्तान को सबक सिखाएगा. वहीं शहीद के पिता ने नम आँखों से कहा कि मुझे अपने बेटे के बलिदान दुःख नहीं बल्कि पर फख्र है. उन्होंने कहा कि उन्हें दुःख है तो सिर्फ इस बात का कि काश उनके सारे बेटे सेना में होते तथा देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों को बलिदान कर देते. उन्होंने अब उनकी कोशिश अपने परिवार से अधिक से अधिक युवाओं को सेना में भेजने की होगी.

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