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इजराइल का जिस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में विरोध किया भारत ने वही झेल रहा भारत का सैनिक भी… कश्मीर में सैनिकों पर अंधाधुंध पत्थरबाजी

कहते हैं कि आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता साहेब! बिल्कुल सही कहा साहब कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता लेकिन वो कौन लोग हैं जो अल्लाह का नाम आतंकी घटनाओं को अंजाम देते हैं तथा निर्दोष लोगों की जान लेते हैं? वो कौन लोग हैं जो जुम्मे की नमाज पढने के बाद सड़कों पर उतर आते हैं तथा सेना के जवानों पर ही हमला कर देते हैं? आखिर इन आक्रान्ताओं को इस सबके लिए कौन और कैसे प्रेरित करता है? हद तो तब हो गयी जबा आज ईद पर भी ये मजहबी आक्रान्ता अपनी हरकतों से बाज नहीं आये तथा सेना की गाड़ियों पर भयंकर पत्थरबाजी की तथा पाकिस्तान व ISIS के झंडे लहराते हुए भारत विरोधी नारे लगाये. आश्चर्य की बाते ये है कि इस्लामिक मौलाना/मौलवी ईद को अमन, मोहब्बत का त्यौहार बताते हैं लेकिन उसके बाद भी ईद की नमाज पढने के देश विरोधी नारे लगाना, आतंकी संगठन ISIS तथा पाकिस्तान के झंडे फहराना, सेना पर पत्थरबाजी करना आखिर कौन सी मोहब्बत का सन्देश है? लेकिन इससे भी बड़ा सवाल ये है कि जिस तरह से मस्जिद में ईद की नमाज पढने के बाद ये घटना हुई है तो क्या ये माना जाए कि मस्जिद में इन सबको ये बताया गया कि नमाज पढने के बाद बाहर जाकर इसको अंजाम देना है, क्योंकि कश्मीर के अनंतनाग में ईद की नमाज के बाद एक-दूसरे को मुबारक बात देने की बजाय पत्थरबाज सड़क पर उतर आए और पथराव करने लगे.

खैर ये एक आईना है तथा जवाब है केंद्र की मोदी सरकार को जिसने संयुक्त राष्ट्र में इजराइल कम खिलाफ वोट किया है. कश्मीर में जिन विकट तथा कठिन परिस्थितियों का सामना भारतीय सेना के जवानों को करना पड़ता है, बिलकुल वही स्थिति फिलिस्तीनी सीमा के निकट तैनात रहने वाले इजराइली सैनिकों की है. लेकिन इजराइल ने वो किया जो एक सशक्त तथा मजबूत राष्ट्र को करना चाहिए. इजराइल की सेना ने इन उग्रवादियों का इलाज बंदूकों की गोली से किया तो संयुक्त राष्ट्र में भारत ने इजराइल के खिलाफ निंदा प्रस्ताव के पक्ष में वोट कर दिया. भारत सरकार ने इजराइल के खिलाफ वोट करके छद्म मानवता का ढोल संयुक्त राष्ट्र में भी पीटा लेकिन कश्मीर में ये ढोल फट गया तथा मजहबी उन्मादी भारतीय सेना पर कहर बनकर टूट पड़े.

गौरतलब है कि इससे पहले दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में शुक्रवार को हिसक भीड़ ने सुरक्षाबलों को घेरकर हाथापाई करने के साथ जमकर पथराव किया. सुरक्षाबलों ने बलप्रयोग कर भीड़ को खदेड़ा। इस दौरान गोली लगने से एक पत्थरबाज की मौत और एक युवती समेत दो अन्य जख्मी हो गए. इसके बाद हिसक झड़पें शुरू हो गई, जिसमें दो सुरक्षाकर्मियों समेत सात लोग घायल हो गए.
जानकारी के अनुसार, सेना की 55 आरआर का एक दल नौपुरा पायीन इलाके से नियमित गश्त पर गुजर रहा था कि अचानक मजहबी आक्रान्ता पत्थरबाजों ने उसे घेर लिया तथा देशविरोधी नारेबाजी करते हुए जवानों पर पथराव शुरू कर दिया. जवानों ने पहले संयम बनाए रखा, लेकिन जब पथराव नहीं रुका और कुछ युवकों ने उनके वाहनों को चारों तरफ से घेर लिया तो उन्होंने भी बल प्रयोग किया.स्थिति को पूरी तरह बेकाबू होते देख जवानों ने चेतावनी देते हुए हवा में गोलियां चलाई तथा इसी दौरान एक पत्थरबाज की मौत हो गयी तथा 9 पत्थरबाज घायल हो गये.

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