बिहार के कोचिंग सेंटर में पढ़ाया जा रहा था जिहाद. पता भी नहीं चलता कि कब आ गयी मौत अगर सतर्क न होती NIA तो

ये सहिष्णु समाज की सहिष्णुता का उठाया जा रहा नाजायज फायदा है या फिर धर्मनिरपेक्षता की आड़ में पाला पोषा जा रहा आतंकवाद और कभी झूठे धरने प्रदर्शन के साथ दबाई जा रही सच की वो आवाज जो नहीं चाह रहे हैं की सच सामने आये . ज्ञात हो की कुछ घटनाओं को ऊपर रख कर एक सोच समझी साजिश के चलते ऐसे मामले को दबा दिया गया जिसका सम्बन्ध सीधे सीधे था बिहार की आंतरिक सुरक्षा से . 

ज्ञात हो की बिहार में लश्कर का एक दुर्दांत आतंकी फरार हो कर विधिवत नाम आदि बदल कर लम्बे समय से रह रहा था और वहां की पुलिस के साथ सरकार और सुरक्षा एजेंसियो९ को पता भी नहीं चला . यद्द्पि शहाबुद्दीन जैसे कुख्यात आतंकी को पालने पोषने वाली पूरवर्ती सरकारों में तुष्टिकरण के चलते ऐसी कार्यवाही की आशा नहीं थी फिर भी इस से कहीं न कहीं समाज के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा भी खतरे में पड़ती दिख रही थी .

ज्ञात हो की भारत को सबसे ज्यादा हानि पहुंचा चुके इस्लामिक आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का फरार आतंकी शेख अब्दुल नईम पहले छत्तीसगढ़ के रायपुर से फरार होने के बाद बिहार के गोपालगंज पहुंच गया था जहाँ उसको अपने रहने लायक सही स्थान और माहौल जरूर लगा रहा होगा . ये वही इलाका है जो बिहार के सबसे कुख्यात अपराधी और लालू यादव के बेहद ख़ास शहाबुद्दीन का इलाका माना जाता है ..वो यही शरण पाया और अपना नाम-पता बदल कर रहना शुरू कर दिया था …बिहार आने के इस आतंकी ने अपना नाम बदल कर सोहेल रख लिया और कोचिंग सेंटर खोल लिया . वहां कई बच्चों को वो उसी कोचिंग की आड़ में आतंक सिखाने और पढ़ाने का काम शुरू कर दिया था ..

ये आतंकी पिछले साल 2014 से बिहार के गोपालगंज में नाम-पता बदल कर रह रहा था जिसकी भनक किसी को भी नहीं लगी और खुलासा होने के बाद स्कूल प्रबंधक के साथ-साथ कोचिंग संस्थान भी सकते में है। कोचिंग संस्थान और स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ वो अपनी जेहादी देश विरोधी , हिन्दुओ के खिलाफ अथाह नफरत रखने वाली आतंकी टीम भी तैयार कर रहा था। इसके साथ उसको गोपालगंज के जंगलिया में अपना नाम बदलते हुए एक मकान किराए पर दिलाया गया और इतना ही नहीं उसने बैंक खाते खुलवाने के साथ साथ वहां की मतदाता सूची में भी अपना नाम दर्ज करवा लिया .

पासपोर्ट और फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया गया जो बिना किसी स्थानीय मदद के किसी भी हाल में संभव नहीं था . इसके बाद ये दुर्दांत आतंकी बिहार के ही गोपालगंज के नगर थाना क्षेत्र स्थित जोधपुर रोड में आईआईएल नाम के कोचिंग संस्थान में मोटिवेशन देने का काम करने लगा। टीचर बन करता था ब्रेन वॉश .. लगभग साल भर कोचिंग संस्थान में पढ़ाने के बाद वो एक निजी स्कूल में अपने दोस्तों के साथ शिक्षक के रूप में जुड़ा और साल 2016 तक बच्चों को पढ़ाता रहा और आतंकी संगठन की भी तैयारी करता रहा। इसी दौरान देश में अलग-अलग जगहों पर हुए आतंकी हमले को लेकर एनआईए की टीम आतंकी शेख अब्दुल नईम की तलाश कर रही थी। जब एनआईए की टीम शेख अब्दुल नईम की तलाश करते हुए गोपालगंज पहुंची तो इस बात की भनक उसे लग गई और टीम के पहुंचने से पहले ही वो कहीं भूमिगत हो गया। जिसके बाद एनआईए की जांच शुरू हुई और उसने कोचिंग सेंटर को खाली करवा दिया। इसी बीच 28 नंवबर को एनआईए ने वाराणसी से शेख अब्दुल नईम को गिरफ्तार कर लिया। नईम से पूछताछ करने के बाद यूपी के प्रतापगढ़ से शाहनवाज को गिरफ्तार किया था।

वहीं पूछताछ के बाद गोपालगंज के सरैया मोहल्ले से बेदार बख्त उर्फ धन्नु राजा की गिरफ्तारी हुई। इन सभी की गिरफ्तारी के बाद से जुड़े लश्कर-ए-तैयबा के संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए एनआईए की टीम गोपालगंज में लगातार छापेमारी कर रही है। आतंकी नईम के बाद लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े बेदार बख्त उर्फ धन्नु राजा की गिरफ्तारी होने पर एनआईए शहर के कई लोगों से पूछताछ कर रही है। सूत्रों की अगर मानें तो लगातार एनआईए की टीम नईम से जुड़े तथ्यों की जांच करने में लगी हुई है। इसको लेकर कई जगहों पर छापेमारी भी की गई है। फिलहाल एनआईए ये भी जांच कर रही है कि नईम का पासपोर्ट कैसे बना, आधार कार्ड कैसे जारी हुआ और बैंक अकाउंट खुलवाने में कौन पहचानकर्ता था? तो दूसरी तरफ ऐसा कहा जा रहा है कि आतंकी नईम ने गोपालगंज में सोहेल खान बनकर जोधपुर रोड के हरि मार्केट में दोस्त के साथ स्मार्ट लर्नर एकेडमी कोचिंग खोल रखी थी। जिसमें वो युवाओं को अपने संगठन से जुड़े खास तरह के मोटिवेशन करने का काम करता था।
इसमें करीब 50 लाख रुपए से कंप्यूटर, प्रोजेक्टर, इंटरनेट की अत्याधुनिक संसाधनों को लगाया था। वहीं आतंकी शेख अब्दुल नईम का बैंक अकाउंट नगर थाने के जंगलिया स्थित बैंक ऑफ इंडिया में था। जिसका पता जंगलिया वॉर्ड 19 दिया हुआ था, सोहेल खान के नाम से खुले इस अकाउंट में पिता का नाम मोहम्मद अली तो बैंक अकाउंट खोलवाने के लिए आतंकी ने किसको गारंटर बनाया था। इसका खुलासा नहीं हो सका है। अकाउंट में पैसा कहां-कहां से आ रहा था, जांच एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं। वहीं सूत्रों की अगर मानें तो बैंक कर्मियों से भी पूछताछ करने की तैयारी की जा रही है, जांच एजेंसी ये जानकारी लेने में जुटी है कि नईम के पास पैसे कहां से आते थे और आतंकी फंड पहुंचने का माध्यम क्या था?

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