कई बार अपने सोचा होगा कि क्या बिगाड़ा है #IndianArmy ने इन तथाकथित नेताओं का और ऐसा क्या दे रहे हैं दुर्दांत आतंकी इन्हें जो हमदर्दी हैं आतंकियों से … जानिये ये सारा खेल

कश्मीर में भारतीय सेना पर हर पल आतंकी हमले का खतरा मंडराता रहता है. सेना अपने सर पर कफ़न बांधकर ड्यूटी करती है. सेना जवान आतंकियों की गोलियां खाता है, आतंक समर्थकों के पत्थर भी खाता है लेकिन हिन्दुस्तान व् हिन्दुस्तानियों की सुरक्षा करने से कभी पीछे नहीं हट्टा लेकिन उसके बाद भी दो टके के तथाकथित राजनेता कभी सेना के पराक्रम पर उंगली उठाते हैं तो कभी सेना को गुंडा कहते हैं. हद तो तब हो जाती है कि देश के तमाम बुद्धिजीवी तथा राजनेता आतंकियों के समर्थन में खड़े हो जाते हैं तथा उनके प्रति हमदर्दी जताते हैं. सवाल ये खड़ा होता है कि आखिर इन राजनेताओं तथा बुद्धिजीवियों की हमदर्दी देश के रक्षक भारतीय सेना के जवानों के बजाय आतंकियों के प्रति क्यों होती है?

अब 10 मई को जम्मू कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने केन्द्र सरकार से मांग की है कि कश्मीर घाटी में रमजान माह में एक तरफ सीज फायर की घोषणा की जाए. यानि जब घाटी में पाकिस्तान से प्रशिक्षित होकर आए आतंकी हमारे सुरक्षा बलों पर हमला करे तो हमारे जवान किसी भी प्रकार से जवाब नहीं दें. हालाँकि महबूबा मुफ्ती के इस प्रस्ताव को लगभग खारिज किया जा चुका है. जरा सोचिये कि एक तरफ सीज फायर में हमारे सुरक्षा बलों के हालात कैसे होंगे? अभी जब जवाब देने पर भी हमारे जवान रोजाना शहीद और जख्मी हो रहे हैं, तब जवाब नहीं देने पर कितने जवान शहीद और जख्मी होंगे इसका अंदाजा शायद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को नहीं है.

बड़े आश्चर्य की बात है कि महबूबा को उपद्रवियों और आतंकियों से, देश के दुश्मनों से तो साहनुभूति हैं, लेकिन अपने सुरक्षा बलों के जवानों से नहीं है. अच्छा होता कि अपने रसूकातों का इस्तेमाल करते हुए महबूबा पहले आतंकियों से सीज फायर की घोषणा करवाती. सीज फायर दोनों पक्षों की ओर से होता है, इस बात को महबूबा भी अच्छी तरह समझती है. लेकिन इसके बाद भी केन्द्र सरकार से एक तरफा सीज फायर की मांग कर रही हैं. मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती जितनी सहानुभूति उपद्रवियों और आतंकियों के प्रति प्रकट करती हैं, उसकी आधी भी यदि सुरक्षा बलों के प्रति दिखा दे तो घाटी में शांति कायम हो सकती है. कश्मीर में महबूबा मुफ्ती की सरकार को टिकाए रखने के पीछे भारतीय जनता पार्टी की राजनीतिक मजबूरी हो सकती है, लेकिन महबूबा हर बार हमारे सुरक्षा बलों को ही निशाना बनाती है.

महबूबा मुफ्ती रमजान में एकतरफा सीजफायर की मांग कर रही हैं तब सवाल खड़ा होता है कि जब रमजान माह प्रत्येक मुसलमान के लिए इबादत का माह होता है तो फिर ये इस्लामिक आतंकी कश्मीर में हमला क्यों करते हैं, जानलेवा वारदातें क्यों करते हैं. इस्लामिक जानकार कहते हैं कि इस्लाम में हिंसा का कोई स्थान नहीं है तब यदि रमजान माह में उपद्रवी और आतंकी घाटी में पत्थर और बंदूक का इस्तेमाल नहीं करें तो आने वाले दिनों में कश्मीर में हालात सुधर सकते हैं.

सुरक्षा बलों के सीज फायर की घोषणा तभी मायने रखती है जब उपद्रवी और आतंकी भी ऐसे ही घोषणा करें. लेकिन यदि हमारे सुरक्षा बलों पर ये इस्लामिक आतंकी हमला करेंगे तो जवाब तो दिया ही जाएगा. जो सेना राष्ट्र की रक्षा करती है उस सेना को अपनी रक्षा करने का भी अधिकार है तभी वह हिन्दुस्तान तथा हिंदुस्तानियों की रक्षा कर पायेगी. खैर महबूबा मुफ्ती तथा आतंकियों को ठीक जवान भारतीय सेना के सेनापति जनरल विपिन रावत दे चुके हैं कि अगर अत्न्कीयों को जान प्यारी है तो हथियार छोड़ दें. अगर ऐसा नहीं करते हैं तो फिर भारतीय सेना की बंदूकें उनको जवाब देने को तैयार हैं. अगर कोई आतंकी हमला करेगा तो उसको भारतीय सेना दफ़न करेगी.

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