अजीत डोभाल जी ही हैं वो शख्सियत जिन्होंने ढीली की चीन की अकड़.. जानिए हर वो बिंदु जिसके बाद खामोश हुआ चीन


डोकलाम विवाद आखिरकार शांत हुआ। ये दोनों देशों के बिगड़ते संबंधो के लिए अच्छी खबर है। भारत ने बिना कोई युद्ध किये ही चीन को शिकस्त दे दी। जहां एक तरफ पहले चीन इस मामले पर बातचीत तक करने को तैयार नहीं था अब वो ही चीन अपने सैनिक हटाने को तैयार हो गया है। चीन की सारी अकड़ मोदी के दाहिने हाथ कहे जाने वाले अजीत डोभाल ने ढीली कर दी और बिना किसी युद्ध को अंजाम दिए भारत ने डोकलाम विवाद का बातचीत से ही हल निकाल लिया।

डोकलाम विवाद के हल होने के पीछे हाली में होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन भी बताया जा रहा है। डोकलाम विवाद के चलते चीन में होने वाले ब्रिक्स देशों के सम्मेलन पर भी असर पड़ने की आशंका थी। भारत ने तय किया था कि इस विवाद के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में चीन नहीं जाएंगे। बता दें कि पीएम मोदी के चीन दौरे की शर्त ही डोकलाम पर विवाद हल करने को रखी गई थी।  
पीएम मोदी का चीन में न आना भी चीन के इस विवाद में भारत की बात मानने के पीछे का कारण बताया जा रहा है क्योंकि ड्रैगन चाहता है कि पीएम मोदी चीन दौरे पर आये। चीन को यह समझ आ ही गया कि भारत उसकी खोखली धमकियों से भारत डरने वाला नहीं है। तरह तरह के नापाक तरिके तक अपनाने में चीन पीछे नहीं हटा लेकिन भारतीय सेना ने भी सीमा पर अपनी तैयारी कर ली थी। युद्ध करने की धमकी का भी चीन को करारा जवाब मिला। बता दे कि 27 जुलाई को अजीत डोवाल बीजिंग गए थे, उसके बाद से बातचीत चल रही थी।
इस बातचीत के चलते चीन ने भारत की शर्तो को मानने से इंकार कर दिया था। 3 अगस्त को चीन ने ये माना था कि डोकलाम पर बातचीत चल रही है। भारत ने चीन को अपनी सैनिको को टकराव की जगह से हटाने की बात कही लेकिन चीन ने मानने से इंकार कर दिया था। लेकिन अब वही चीन ने भारत की बात मानने की हामी भर ली है। ब्रिक्स सम्मेलन से ठीक पहले डोकलाम विवाद का हल निकाल आया और अब इसके हल होते ही चीन को पीएम मोदी के चीन दौरे के बारे में कोई आशंका नहीं रहा।
यह भारत की सबसे बड़ी जीत और चीन की हार है। आपको बता दें कि इस डोकलाम विवाद में चीन ही नहीं बल्कि भारत भी अपने सैनिक हटाएगा और.भारत ने डोकलाम पर समझौते में सैनिकों के यानी जगह से अलग होने की बात की है. जिसका मतलब ये है कि भारत डोकलाम से अस्थाई तौर पर हट रहा है, अगर आगे चीन कुछ करेगा तो फिर भारत फिर आ सकता है। चीन ने सड़क बनाने को लेकर ये टकराव शुरू किया था अब वो सड़क चीन नहीं बना पाएगा।
भारत ने इस विवाद को बिना किसी युद्ध के यह साबित कर दिया कि बिना किसी उकसावे के बातचीत से हर मुद्दा हल करने में सक्षम है। ये डोकलाम के ज़रिए भारत ने उन सभी देशों को बता दिया है, जिन देशों से चीन जमीन को लेकर लड़ता रहा है और उनको धमकाता रहा है। उनकी जमीन पर धीरे धीरे कब्ज़ा करता रहा है। अब कोई भी देश चीन की धमकियों से नहीं डरेगा। 

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