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देश के दुश्मनों पर अब बाज की नजर रखेगा भारत.. “मिशन शक्ति” के बाद इसरो की एक और सफलता से झूम उठा राष्ट्र

अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी ‘मिशन शक्ति’ के बाद भारत ने इस दिशा में एक और कदम बढ़ा दिया है.  अपने वैज्ञानिकों की मेहनत के कारण भारत अन्तरिक्ष की दुनिया में एक के बाद एक ऐसे इतिहास रचता जा रहा है, जिससे दुनिया के लिए भारत की अहमियत और ताकत बढ़ती ही जा रही है. आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अन्तरिक्ष में ऐसी सफलता हासिल की है, जिससे भारत देश के दुश्मनों पर बाज की रखेगा. इसरो की इस सफलता के बाद आज पूरा राष्ट्र देश के वैज्ञानिकों तथा भारत सरकार को धन्यवाद कर रहा है.

आपको बता दें कि आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से आज सुबह 9.27 पर भारतीय रॉकेट पोलर सैटेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी) द्वारा इलेक्ट्रॉनिक इंटेलीजेंस उपग्रह, एमिसैट का प्रक्षेपण किया गया. एमिसैट का प्रक्षेपण रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) के लिए किया जा रहा है. दुश्मन पर नज़र रखने के लिहाज से भी एमिसैट काफी महत्वपूर्ण है. सुबह 9.27 बजे उड़ान भरने के लगभग 17 मिनट बाद रॉकेट 749 किलोमीटर दूर स्थित कक्षा में 436 किलोग्राम के एमीसेट को प्रक्षेपित किया. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सामरिक क्षेत्रों से उपग्रहों की मांग बढ़ गई है.

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एमिसैट के साथ पीएसएलवी रॉकेट तीसरे पक्ष के 28 उपग्रहों को ले गया है और अपने तीन अलग-अलग कक्षों में नई प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन भी करेगा. इसरो के अनुसार, रॉकेट पहले 436 किग्रा के एमिसैट को 749 किलोमीटर के कक्ष में स्थापित करेगा. इसरो का ये प्रक्षेपण सफल हुआ है, 28 उपग्रहों को लेकर गया PSLV ने ऑर्बिट में प्रवेश कर लिया है. इसके बाद यह 28 उपग्रहों को 504 किमी की ऊंचाई पर उनके कक्ष में स्थापित करेगा. इसके बाद रॉकेट को 485 किमी तक नीचे लाया जाएगा जब चौथा चरण/इंजन तीन प्रायोगिक भार ले जाने वाले पेलोड के प्लेटफॉर्म में बदल जाएगा.

27 घंटे की गिनती खत्म होने के बाद इसरो के विश्वसनीय प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-क्यूएल के नए प्रकार करीब 50 मीटर लंबे रॉकेट का यहां से करीब 125 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोट अंतरिक्ष केंद्र से सुबह नौ बजकर 27 मिनट पर प्रक्षेपण किया गया. एमीसैट उपग्रह का उद्देश्य विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम को मापना है. इसरो के अनुसार, प्रक्षेपण के लिए पहले चरण में चार स्ट्रैप-ऑन मोटर्स से लैस पीएसएलवी-क्यूएल रॉकेट के नए प्रकार का इस्तेमाल किया जाएगा.

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गौरतलब है कि पीएसएलवी का भारत के दो अहम मिशनों 2008 में ‘‘चंद्रयान’’ और 2013 में मंगल ऑर्बिटर में इस्तेमाल किया गया था. यह जून 2017 तक 39 लगातार सफल प्रक्षेपणों के लिए इसरो का सबसे भरोसेमंद और बहु उपयोगी प्रक्षेपण यान है. इस मिशन में इसरो के वैज्ञानिक तीन अलग-अलग कक्षाओं में उपग्रहों और पेलोड को स्थापित करेंगे जो एजेंसी के लिए पहली बार होगा. अन्य 28 अंतरराष्ट्रीय उपग्रहों में लिथुआनिया के दो, स्पेन का एक, स्विट्जरलैंड का एक और अमेरिका के 24 उपग्रह शामिल हैं. इसरो ने बताया कि इन सभी उपग्रहों का वाणिज्यिक समझौतों के तहत प्रक्षेपण किया जा रहा है. फरवरी में इसरो ने फ्रेंच गुआना से भारत का संचार उपग्रह जीसैट-31 प्रक्षेपित किया था.

इसरो के अध्यक्ष के. सिवान के अनुसार, “यह हमारे लिए विशेष मिशन है. हम चार स्ट्रैप ऑन मोटर्स के साथ एक पीएसएलवी रॉकेट का इस्तेमाल करेंगे, इसके अलावा पहली बार हम तीन अलग-अलग ऊंचाई पर रॉकेट के जरिए ऑर्बिट में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं.” एमिसैट सुरक्षा के नजरिए से भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे इसरो और डीआरडीओ ने मिलकर बनाया है. इसका खास मकसद पाकिस्तान की सीमा पर इलेक्ट्रॉनिक या किसी तरह की मानवीय गतिविधि पर नज़र रखना है. यानी बॉर्डर पर ये उपग्रह रडार और सेंसर पर निगाह रखेगा. ना सिर्फ मानवीय बल्कि संचार से जुड़ी किसी भी तरह की गतिविधि पर नज़र रखने के लिए इस उपग्रह का इस्तेमाल हो सकेगा.

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