“कितने अफजल मारोगे” के बाद अब आया एक नया नारा जो लगाया जा रहा है दिल्ली में..

अभी कुछ समय पहले ही दिल्ली से लगाया गया एक नारा भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में बना था चर्चा का विषय और पहिचान हुई थी एक कालेज की जहाँ एक विशिष्ट मानसिकता के कुछ गिने चुने वो छात्र पढ़ते थे जिनकी पढ़ाई की उम्र तक पर सवाल खड़े हो रहे हैं . उस समय नारा लगा था कि ” तुम कितने अफजल मारोगे ” .. यद्दपि ये नारा लगाने वाले बाद में अपने जोश के साथ सिमट गये थे पर उनके कृत्यों को सबने देखा और जाना भी .

पर अब उसी नारे का एक एकदम नया वर्जन कहा जा सकता है जो दिल्ली में लग रहा है . ये नारा लगाने वाले हैं  आतंकियों की खुली पैरवी के लिए कुख्यात उमर खालिद के बेहद करीबी जिग्नेश मेवानी और इस नारे के बोल हैं कि – ” तुम किस किस को कैद करोगे”.. फिलहाल इस नारे को सुनने वालों में से अधिकतर ने ये माना है कि इसके बोल ठीक उसी नारे से मिलते जुलते हैं जो कभी JNU में लगा कर देश और दुनिया को अपनी एक ख़ास पहिचान बताई गयी थी .  किस किस को कैद करोगे’ नाम से कैंपेन अगेन्स्ट स्टेस रिप्रेशन के बैनर तले इस प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन रिहाई मंच, आइसा, भीम आर्मी, बिगुल मज़दूर दस्ता, मज़दूर एकता संगठन और समाजवादी जनपरिषद समेत करीब तीस संगठनों ने मिल कर किया था.

यहाँ ध्यान देने योग्य है कि रिहाई मंच वही है जो पुलिस द्वारा पकड़े गये आतंकियों के साथ खुल कर खड़ी होती है और उन्हें कानूनी सुविधा मुहैया करवाती है . जबकि दूसरा संगठन भीम आर्मी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुए रक्तरंजित दंगो के लिए चर्चा में आया था .  भीमा कोरेगाव मामले में हिन्दू समाज को तोड़ कर कई टुकड़ों में बाँट देने की साजिश करने वालों को सरकार ने सख्ती दिखाते हुए पकड़ा है .. लेकिन ये बात जिग्नेश मेवानी को सरकारी अत्याचार लग रही है . उसी के खिलाफ इस समय जिग्नेश मेवानी गुजरात से निकल कर दिल्ली तक पहुच गये हैं और उन्होंने तल्ख़ अंदाज़ में कहा है कि – यदि मुसलमान सत्ता के ख़िलाफ़ खड़ा होता है तो उसे जिहादी आतंकवादी कह दो, यदि दलित और आदिवासी खड़ा होता है तो उसे नक्सलवादी या माओवादी बोल दो. इसी मकसद के तहत इस पूरी कंस्पीरेसी को राजसत्ता ने अंजाम दिया है.

खुद को दलितों का बड़ा नेता बनाने का प्रयास करते जिग्नेश मेवानी ने ये बातें दिल्ली के प्रेस क्लब में शनिवार दोपहर साढ़े तीन बजे शुरु हुई प्रेस कांफ्रेंस में कही .. इतना ही नहीं इस कांफ्रेंस में जिग्नेश ने देश के करीब तीस संगठनों को बुलावा भेजा था जिनके नाम से ज्यादातर लोग वाकिफ नहीं हैं . उस सभी ने एक स्वर में प्रेस कांफ्रेस में कहा कि मौजूदा सरकार क़ानूनों का ग़लत इस्तेमाल कमज़ोर तबके के हकों की बात करने वालों और बुद्धिजीवियों की आवाज़ दबाने के लिए कर रही है जिसे रोका जाना अब वक्त की ज़रूरत बन गया है.

 

राष्ट्रवादी पत्रकारिता को समर्थन देने हेतु हमे आर्थिक सहयोग करे. DONATE NOW पर क्लिक करे
DONATE NOW