मदरसों के बारे में मौलाना अरशद मदनी द्वारा बताया गया ये इतिहास क्या आप जानते थे ? और क्या आप इस से सहमत हैं ?

जैसे जैसे चुनाव नजदीक आने लगे हैं वैसे वैसे राजनेताओं के साथ साथ वो मजहबी मौलाना भी बोलने लगे हैं जो अब तक ख़ामोशी से बैठे थे . इसमें सबसे पहले नाम आ रहा है मौलाना अरशद मदनी का जिन्होंने ने इशारे इशारे में ही मुसलमानों को कांग्रेस का साथ देने की बात कह डाली है और भारतीय जनता पार्टी को संविधान के साथ साथ मुसलमान विरोधी घोषित कर डाला है . ये वही मौलाना हैं जो आतंकियों को कानूनी सहायता देने के एलान के बाद चर्चा में आये थे .

मौलाना अरशद मदनी का दावा है कि आज़ादी की लड़ाई में मदरसों का बहुत बड़ा योगदान है जिसने अंग्रेजो के खिलाफ जंग में बहुत बड़ा योगदान और यहाँ पढने वालों ने बलिदान दिया था .  ज्ञात हो कि इसी चुनावी उठापटक के दौर में अब मुसलमानों के सबसे बड़े सामाजिक संगठन जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने आज भाजपा पर संविधान के साथ-साथ मुस्लिमों के शरई अधिकारों को भी नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस मुस्लिम कौम की दुश्मन जरूर है लेकिन उसने हमारे संविधान को क्षति नहीं पहुंचायी है। मौलाना मदनी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बना सपा—बसपा का गठबंधन ठीक है। धर्मनिरपेक्ष ताकतों का गठबंधन होना चाहिये। हम हमेशा से ऐसी ताकतों के हिमायती रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी को फिरका परस्त अर्थात साम्प्रदायिक शक्ति बताते हुए मौलाना मदनी ने जमीयत के जिला प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए मौजूदा सियासी हालात का जिक्र किया और कहा कि कांग्रेस ने मुसलमानों को बहुत नुकसान पहुंचाया है लेकिन उससे हमारे संविधान को कोई खतरा नहीं है। हमें फिरकापरस्त ताकतों से ज्यादा खतरा है। साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ जो भी खड़ा होगा, हम उसके साथ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने बेहिसाब नुकसान पहुंचाया है। उसने संविधान के साथ—साथ हमारे शरई अधिकारों पर भी चोट की है। कांग्रेस मुसलमानों की दुश्मन जरूर है लेकिन उसने हमारे संविधान को क्षति नहीं पहुंचायी है। फिलहाल  मदरसों का आज़ादी की लड़ाई में बड़ा योगदान बताने वाले मौलाना अरशद मदनी ने  नई बहस छेड़ दी है जिस पर तमाम अलग अलग लोग अपनी अलग अलग राय रख रहे हैं . 

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