कम्पटीशन की तैयारी करते छात्रों के लिए वरदान के समान है हाईकोर्ट की ये टिपण्णी.. लाखों छात्रों का कैरियर इसी से हुआ था तबाह


निश्चित रूप से प्रतियोगी परीक्षा में बैठने वाला हर छात्र कभी न कभी इस व्यवस्था से प्रताड़ित हुआ होगा . ये वो व्यवस्था थी जिसके खिलाफ कभी कोई असफल छात्र मुह खोल कर कह नहीं पाता था और सफल हुए छात्र आगे बढ़ जाया करते थे पीछे की तमाम बातों को भूल कर के . अब उसी मुद्दे पर आया है एक बड़ा फैसला जिसको दिया है मद्रास हाईकोर्ट ने , इस फैसले के बाद लाखों प्रतियोगी छात्रों के चेहरे पर जहाँ मुस्कान आ गयी है वहीँ इस से निजात पाने की आहट भी .

ज्ञात हो कि ये व्यवस्था थी परीक्षा में होने वाली निगेटिव मार्किंग जहाँ पर गलत उत्तर देने पर नम्बर काट लिए जाते थे . मद्रास हाईकोर्ट ने ये माना है कि इसके चलते छात्रों के मस्तिष्क पर असर पड़ रहा है और उनके अनुमान लगाने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है .   उस मामले की याचिका दाखिल करने वाले याचिकाकर्ता प्रभाकर वर्ष २०१३ में एक परीक्षा में बैठे थे. उन्होंने एससी श्रेणी के तहत यह परीक्षा दी थी. निगेटिव मार्किंग के चलते वह कट ऑफ से तीन नंबर पीछे रह गए थे.

मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि सीबीएसई द्वारा संचालित होने वाली जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में निगेटिव मार्किंग की व्यवस्था पर फिर से विचार किए जाने की जरूरत है क्योंकि, यह मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करता है और उन्हें बुद्धिमानी के साथ अंदाजा लगाने से रोकता है. न्यायमूर्ति आर महादेवन ने जेईई (मुख्य) परीक्षा में बैठे एस नेलसन प्रभाकर की एक याचिका का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की.


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